प्यार का स्पंदन (03/31/2026)

मार्च ३१, २०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# २९६३

                          प्यार का स्पंदन

अति-उत्तम है प्यार का स्पंदन
बेशर्ते निस्वार्थ हो वो प्यार
प्यार आरोग्यता का उपाय है ऐसा
जिस से निरोगी हो सकता है समस्त संसार।

चाहे हो वो मानसिक या शारीरिक रोग
चाहे वो हो कर्मों का भोग
निस्वार्थ प्यार है उत्तम उपचार
अनमोल है निस्वार्थ प्यार।

किंतु हम इंसानों का अहंकार
हमें करने नहीं देता निस्वार्थ प्यार
ना जाने कैसे और क्यों
स्वार्थ के समक्ष प्यार मान लेता है हार।

गुरुजी हैं परवरदिगार
वे करें सारी संगत से निस्वार्थ प्यार
ये जानते हुए कि हमारे में हैं अनगिनत विकार
गुरुजी सदा रहते हैं निर्विकार।

कर पायें हम जो गुरुजी से निस्वार्थ प्यार
तो और भी शुद्ध हो जाये हमारे भीतर का संसार
बाहरी संसार तो वैसे ही हमारा नहीं
क्यों ना भीतर के संसार का वातावरण बनायें सही
गुरुजी संग निस्वार्थ प्यार का रिश्ता निभायें
इस निस्वार्थ प्यार के पारस्परिक नाते में रम जायें
बाहरी संसार की वफ़ा तो कभी कम होती है कभी ज़्यादा
गुरुजी संग वफ़ा का निभायें श्रद्धा से वादा
यही रिश्ता आगे भी काम आयेगा
बाक़ी हर रिश्ता यहीं रह जाएगा
क़र्ज़ और फ़र्ज़ हैं बाक़ी रिश्ते सब
निस्वार्थ रिश्ता निभाते हैं केवल रब
हम भी छोड़ दें इस रिश्ते में लेन देन और व्यापार
निस्वार्थता को अपनाकर हम करें गुरुजी के निस्वार्थ प्यार को स्वीकार।

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जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा

प्यार का स्पंदन (03/31/2026)

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