शुक्राना हर उस दिव्य शक्ति का… (05/04/2026)

मई ४, २०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# २९९७

शुक्राना हर उस दिव्य शक्ति का…

परम पूज्य गुरुवर,

शुक्राना हर उस दिव्य शक्ति का
जिसने मुझे आप तक पहुंचाया
अनंतम शुक्राना आपका
कि आपने मझ नाचीज़ को अपनाया।

आपके चरणों में मुझे
सुकून का जो संसार नज़र आया
वैसा संसार और वैसा अनुभव
मैने पहले कभी ना था पाया।

ऐसे अनुभव भी हुए
जिन्होंने भीतर तक मुझे हिलाया
पर उनकी बदौलत आपने
मुझे हकीकत से वाक़िफ़ कराया।

और अनगिनत लम्हे आपके उस प्यार के
जो आपने हर क्षण है बरसाया
उस प्यार से रूह के संग केवल मेरा मन और तन ही नहीं बल्कि हर पाल भीगता है मेरे संग मेरा साया।

देकर मेरी सोच को रूहानी नज़रिया
आपने जीवन के बारे में इतना कुछ समझाया
प्रोत्साहित कर के सकारात्मक सोच मेरे मन में
आपने मेरे हर संशय और भय को मिटाया।

आपने अपने नाम का दीप जलाकर
मुझे स्वयं के भीतर जाने का रास्ता दिखाया
आत्म-निरीक्षण के लिए मुझे प्रेरित कर
आप संवार रहे हैं मेरी रूहानी काया।

शुक्र है, बेहद शुक्र है
जो आपने आज तक हर करम है कटवाया
आगे भी आप ही कटवाइयेगा बाक़ी का प्रारब्ध
देते रहिएगा अपने सानिध्य की शीतल छाया।

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा

शुक्राना हर उस दिव्य शक्ति का… (05/04/2026)

ये दरिया है… (05/03/2026)

मई ३, २०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# २९९६

                          ये दरिया है…

ये दरिया है रूहानी प्यार का
गुरुजी के दिव्य दुलार का
इसमें बहता जो अमृत है
उसके पान में भक्तों का हित है।

ये दरिया नहीं साधारण
ये परिपूर्ण है हर क्षण
गुरुजी के प्यारे आशीर्वाद से
गुरुजी की मधुर याद से।

इस दरिया में बहते अमृत का स्पर्श
देता है भक्तों को आंतरिक हर्ष
जो कर ले इस दरिया में स्नान
उसे हो जाये ऐसा ज्ञान
जो केवल गुरुजी की दया से है मुमकिन
जो मिल नहीं सकता गुरु कृपा के बिन।

इस दरिया की हर बूँद है एक महासागर से भी अधिक प्रबल
इस दरिया के बहने से हर स्थान हो जाता है निर्मल
इस दरिया के अमृत से धुलता है मन का मल
इस दरिया के प्रबल प्रभाव से अंतस् होता है शीतल।

ये दरिया बहुत शक्तिशाली है
इस दरिया की महिमा निराली है
इस दरिया ने संगत के लिए इतने तूफ़ान हैं सहे
गुरुजी के आशीर्वाद से ये दरिया सदा बहे।

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा

ये दरिया है… (05/03/2026)

बस, चलता जा (05/02/2026)

मई २, २०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# २९९५

                         बस, चलता जा

अरे, गुरुजी ने तुझे चुना
ना सोच की उन्होंने नहीं सुना
लग रही है देरी
क्यूंकि भारी थी प्रारब्ध की ढेरी।

ना कर तू गम
भार हो रहा है कम
बहुत बड़ी है गुरुजी की रहमत
इस सत्य से तू रह सहमत।

तेरे भाग्य के हर नासूर का
गुरुजी कर रहे हैं उपचार
देकर अपना निर्मल स्पर्श
देकर अपना दिव्य प्यार।

गुरुजी के दिए मरहम से ज़्यादा उत्तम
सृष्टि में नहीं है कोई उपाय
इसलिए उनका नाम तू लेता चल
और जप “ओम नमः शिवाय।”

नासूर होंगे दूर
हर ज़ख़्म भर जाएगा
श्रद्धा और सबूरी रख
तू ज़रूर तर जाएगा।

तू गुरुजी की याद में रह मस्त
वे तेरा तन, मन, मस्तिष्क करेंगे स्वस्थ
सजा रहे हैं वे तेरे वास्ते
कल्याण से भरे रास्ते
तू नासूर के दर्द से ना घबरा
तू उनका नाम लेकर, बस, चलता जा।

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा

बस, चलता जा (05/02/2026)

अनुकूल परिवर्तन (05/01/2026)

मई १, २०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# २९९४

                      अनुकूल परिवर्तन 

जीवन का रास्ता इतना साधारण भी नहीं
कि जो जी चाहे वही तुरंत मिल जाये
और ये ज़रूरी नहीं की तुम हो उसे पाने के लिए तैयार
इसलिए आत्मा-निरीक्षण जारी रखो बारम्बार।

परिवर्तन भी हो रहा है
बेशक तुम्हें दिख ना रहा हो
गुरुजी तुम्हारे दिल की बात जानते हैं
बेशक तुमने उनसे ना कहा हो
अरे, वे तो अंतर्यामी हैं
सारी सृष्टि के स्वामी हैं
गुरुजी जानें हर दात बख्शने का सही समय
इसमें नहीं है तनिक भी संशय।

गुरुजी की शरण में बीत रहा है जो इंतज़ार
उसके दौरान गुरुजी तुम्हें कर रहे हैं तैयार
तुम्हारे भविष्य के लिए, ताकि तुम आगे बढ़ो
इसलिए ना हो अधीर, ना ही डरो।

कोई योजना श्रेष्ठ नहीं है गुरुजी की योजना से, ये निश्चित है
गुरुजी जो भी कर रहे हैं, उसमें तुम्हारा हित है
गुरुजी को तुम्हारी की हुई हर प्रार्थना में है ऊर्जा
इसलिए ये ना सोचना कि व्यर्थ है पूजा
उनकी याद में जीते चलो
उनके नाम का अमृत पीते चलो
समय से पहले फूल नहीं खिलता
समय से पहले कुछ नहीं मिलता
विश्वास का वज्र उठाओ
ख़ुद को बेहतर बनाओ
गुरुजी को करते चलो प्रसन्न
ज़रूर होगा अनुकूल परिवर्तन।

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जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा

अनुकूल परिवर्तन (05/01/2026)

जो अंग संग रहता है… (04/30/2026)

अप्रैल ३०, २०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# २९९३

     जो अंग संग रहता है…

जो अंग संग रहता है
जो दिल की सदा सुनता है
वो आप हो गुरुजी
बस आप ही गुरुजी।

जग आपके सहारे
दिल आपको पुकारे
बस आपको ही, आपको ही
आपको गुरुजी
जो साथ साथ चलता है
राहें रोशन करता है
वो आप हो गुरुजी
बस आप ही गुरुजी।

आप ही तो तारते हो
आप ही संवारते हो
बस आप ही बस आप ही
बस आप ही गुरुजी
जो प्यार बहुत करता है
जो झोली भी भरता है
वो आप हो गुरुजी
बस आप ही गुरुजी।

जो अंग संग रहता है
जो दिल की सदा सुनता है
वो आप हो गुरुजी
बस आप ही गुरुजी।

सिमरन का दान दिया है
सत्संग का दान दिया है
बस आपने ही, आपने ही
आपने गुरुजी
जो बख़्शीशें देता है
जो आसीसें देता है
वो आप हो गुरुजी
बस आप ही गुरुजी।

चाहे झूठे हैं या सच्चे
सब आपके हैं बच्चे
बस आपके ही आपके ही
आपके गुरुजी
जो क्षमादान देता है
जो प्राणदान देता है
वो आप हो गुरुजी
बस आप ही गुरुजी।

ब्रह्मा विष्णु आप ही हैं
महादेव भी आप ही हैं
बस आप ही बस आप ही
बस आप ही गुरुजी
सृष्टि के करता धर्ता
सबके ही दुखों के हरता
वो आप हो गुरुजी
बस आप ही गुरुजी।

जो अंग संग रहता है
जो दिल की सदा सुनता है
वो आप हो गुरुजी
बस आप ही गुरुजी।

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा

क्या सोच रहा है तू (04/29/2026)

अप्रैल २९, २०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# २९९२

        क्या सोच रहा है तू 

क्या सोच रहा है तू
याद कर रहा है तू क्या
गुरुजी को सब है पता
तू उन्हें बेशक ना बता।

क्या है तेरा इरादा
तू कौनसा वादा है निभाता
तूने तोड़ा है कौनसा वादा
गुरुजी जानें तुझसे भी ज़्यादा।

उनसे कुछ नहीं छिपा
तेरी खूबी हो या हो तेरी खता
किसी और को बेशक ना हो पता
इसलिए इस ग़लत फ़हमी को तू मन से ले हटा
कि तुझे कोई देख नहीं रहा
क्यूँकि चाहे उन्होंने तुझे ना हो कहा
पर तुझपर है उनकी नज़र
हर कदम और हर मोड़ पर
और यही तेरे लिए अच्छा है
क्यूंकि तू असल में अभी भी बच्चा है
और वे तेरे माई बाप
जो अपने आप
करते हैं तेरी रक्षा
देते हैं पूरी सुरक्षा।

हर सोच और हर कार्य उनके चरणों में कर ले अर्पित
वे तेरे सबसे बड़े शुभचिंतक हैं, सदा करेंगे तेरा हित
करते हुए शुक्राना और फ़रियाद
तू करता चल उन्हें याद
बेशक मीठा या कड़वा लागे गुरु प्रसाद
उसमें है मंगलमई आशीर्वाद
इसलिए उसे सादर ग्रहण कर
और हर दर्द को सहन कर
गुरुजी पर हो जा क़ुर्बान
वे देंगे प्राणों का दान।

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा

राही का सफ़र (04/28/2026)

अप्रैल २८, २०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# २९९१

                         राही का सफ़र

कई साल गए गुज़र
यूँ चल रहा था राही का सफ़र
कि उसे अकेला सा महसूस होता था
भीड़ में भी अकेलेपन से रोता था
लगता था उसे कि तमाशा है संसार
लगता था उसे कि कहीं और है असल ख़ुशी का द्वार
ना आता था उसे लोगों का व्यवहार समझ
तो जाता था और भी उलझ।

फिर गुरुजी की कृपा हुई उसपर
गुरुजी ने उसपर डाली अपनी मेहर-ए-नज़र
क्यों उसे दुनिया वाले ना लगते थे अपने, गुरुजी ने उसे समझाया
गुरुजी संग रूहानी तार जोड़कर उसने अपने सवालों का जवाब पाया।

ये जाना उसने
ये माना उसने
कि चाहे निस्वार्थ हो या स्वार्थी
सभी की होती है अपनी ही कार्यावली
प्यार सोच कर मोह जताया जाता है अक्सर
दुनिया है बाज़ार और जाने अनजाने में भावनाओं का भी व्यापार होता है अक्सर
वो भी था व्यापार जिसे राही समझ रहा था प्यार
सोचा उसने की क्या ऐसा ही होता है संसार?
जाना उसने की कोई बुरा नहीं, बस, सभी हैं अलग
बाहरी आडंबर को ही कहते हैं जग।

राही गुरुजी संग तार जोड़ पाया
गुरुजी ने उसे ऊँची अवस्था पर पहुँचाया
जागृत होकर उसने लिया निर्णय
इसलिए नहीं था कोई संशय
फैसला किया सभी को मन से छोड़ देने का
सभी से मोह के बंधन को तोड़ देने का।

केवल दूसरों से मुंह मोड़ने के लिए नहीं
बल्कि स्वयं के भीतर लौटने के लिए
अपनी चेतना से हुई दोबारा पहचान
उसने चेतना को आखिरकार अपना लिया मान।

भीड़ में दूजों के साथ दिल मिलाने के बजाये
उसने पा लिया था अपने भीतर गुरुजी से दिल मिलाने का उपाय
जो दिल टूट जाता था बार बार
दूजों के झूठ और नियंत्रण से
उसी दिल ने हर कमज़ोरी कर ली पार
सकारात्मक परिवर्तन से।

उसने बदली अपनी धारणाएं भी
रूहानी उन्नति की ओर केंद्रित किए विचार सभी
अब दबा ना पाता उसे दूजों का अभिमान
गुरुजी की दया और कृपा से खिला उसका आत्मा-सम्मान।

नीवेंपन की नींव पर बनती चली इबादत की इमारत
मोह छूटा तो छोटी दूजों के प्रति शिकायत
राही ने छोड़ा दूजों को मनाना
शुरू किया उसने अपनी बिगड़ी को बनाना।

जो राज़ी नही था रिश्ता निभाना सत्य के साथ
उसके मन ने छोड़ दिया थामना उनका हाथ
जितना हुआ दुनिया वालों के शोषण और उपयोग से दूर
उतना ही उसके भीतर और चेहरे पर छाया गुरुजी का नूर।

इस नूर ने किया राही की राहों को उज्जवल
गुरुजी की याद में रहने लगा वो हर पल
उसे समझ आया कि उसे लगता था दूसरों के संग रहना ज़रूरी
क्यूँकि उसकी स्वयं से थी बहुत ही बड़ी दूरी
जैसे जैसे गुरुजी को चेतने लगा उसका चित्त
वो दूरी गई मिट।

अब जो उसने निरंतर गुरुजी का सानिध्य पाया
तो राही ने स्वयं को सम्पूर्ण पाया
गुरुजी में अपने आप को खो कर
गुरुजी, बस गुरुजी का हो कर।

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जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा

राही का सफ़र (04/28/2026)

मैं भी हूँ मुसाफ़िर (04/27/2026)

अप्रैल २७, २०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# २९९०

                         मैं भी हूँ मुसाफ़िर

मैं भी हूँ मुसाफ़िर, और मुसाफ़िर ही हो तुम
हर मुसाफ़िर समय के चक्र में कभी ना कभी होता है गुम

पर सोचता है अक्सर या कभी कभी
कि वो जानता है सभी
और इस भ्रम में गुज़ारता है सफ़र
फिर जब रास्ता नहीं आता नज़र

तो भटकने लगता है
तड़पने लगता है
जाता है जान अपना ही अज्ञान

और जब होती है अज्ञानता की पहचान
तो फिर ढूँढने लगता है पथ
और उस पथ पर अपनी पत

लेकिन देख पाता है केवल अंधकार
और महसूस करता है लाचार।

और जिस मुसाफ़िर का सफ़र होता है गुरु के सहारे
मुश्किल के बावजूद भी उसके हो जाते हैं वारे न्यारे
गुरु की दिव्य ज्योत उस मुसाफ़िर के पथ का अंधकार करती है दूर
और कर के उसके हर अहम और भ्रम को चूर
उसे अवगत कराती है उसकी खामियों से

और वाक़िफ़ होते हुए उसकी परेशानियों से
गुरु करते हैं मुसाफ़िर का मार्गदर्शन
और कर के उसके अंतस का पवित्रीकरण
बनाकर उसे पात्र अपनी कृपा और मेहरबानी का
संवारते हैं रूप उसकी ज़िंदगानी की कहानी का।

शुक्र है तुम और मैं हैं गुरुजी महाराज की शरण में
भाग्यशाली हम जो उन्होंने बुलाया अपने चरण में
उनसे है ये विनम्र अरदास
की सदा रखें हमें अपने पास
अपनी रहमत से हमें अपनी कृपा का पात्र बनायें
और सभी पर सदा अपनी दयादृष्टि बरसायें।

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जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा

मैं भी हूँ मुसाफ़िर (04/27/2026)

गुरुजी महाराज को नमन (04/26/2026)

अप्रैल २६, २०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# २९८९

     गुरुजी महाराज को नमन

कष्टों को निवारने वाले
जीवन को संवारने वाले
मुश्किल से निकालने वाले
गुरुजी महाराज को नमन।

रोम रोम में सिमरन बख्शने वाले
हृदय के निवास में बसने वाले
भक्त के दर्द को समझने वाले
गुरुजी महाराज को नमन।

सत्संग में बिठाने वाले
लंगर प्रसाद छकाने वाले
आशीर्वाद बरसाने वाले
गुरुजी महाराज को नमन।

अंधेरे से उजाले में ले जाने वाले
रास्ता दिखाने वाले
सकारात्मक सोच बुझाने वाले
गुरुजी महाराज को नमन।

तारने वाले, सुधारने वाले
संवारने वाले, संभालने वाले
तराशने वाले, निखारने वाले
गुरुजी महाराज को नमन।

भक्त को अपनाने वाले
भक्त को गले से लगाने वाले
भक्त को आँचल में समाने वाले
गुरुजी महाराज को नमन।

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा

होना भी अगर चाहो तुम… (04/25/2026)

अप्रैल २५, २०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# २९८८

    होना भी अगर चाहो तुम…

होना भी अगर चाहो तुम
तो हो नहीं सकते किसी के अपने
और कोई भी तुम्हारा अपना है
ऐसे ख़याल हैं महज़ कुछ सपने।

हकीकत है ये, मान लो तो है अच्छा
इक रिश्ते के अलावा कोई रिश्ता नहीं है सच्चा सुच्चा
वो रिश्ता है गुरुजी का तुम्हारे साथ
इस रिश्ते में है वह बात…
जो रूह को छू जाती है
जो निर्मल सुकून लाती है
रोम रोम में तुम्हारे…
और बेशक खड़ी हों लाखों दीवारें
गुरुजी देते हैं उन्हें तोड़
ताकि तुम सब कुछ छोड़
उनके ही हो जाते हो
उनसे यूँ जुड़ जाते हो
जैसे तरुवर से डाली और फूल…
और बनकर उनके चरणों की धूल
कर देते जो उन्हें स्वयं को अर्पण
और उनकी ही याद में रहते हो हर क्षण।

ये गुरुजी की महर से ही होता है
कि भक्त इतना उनमें खोता है
कि संसार में रहते हुए भी
फ़र्ज़ और कर्मों का भार सहते हुए भी
उसका ध्यान होता है गुरुजी की ओर
और गुरु चरण होते हैं उसकी आरम्भिक और अंतिम छोर।

जिसका गुरुजी की ओर मुख है
वह जाने की गुरुजी के चरणों में हर सुख है
गुरु चरणों में है धीरज और संतोष
गुरुजी ही मिटा सकते हैं हर दोष
और मिटा कर भक्त की रूह पर लगा हर दाग
गुरुजी अपनी कृपा से बनाते हैं रूह को पाक…
और यूँ कर के रूह को तैयार
वे ले जाते हैं इस भवसागर के पार
रूह की मंजिल है जहाँ
जहाँ है सचखंड का जहाँ।

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा