अप्रैल २, २०२६
ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏
# २९६५
गुरुजी की कृपा अपरम्पार
ना शोक से ना भय से
ना मन में किसी संशय से
मृत्यु में करना प्रवेश
तुम्हारे संग होंगे तुम्हारे सर्वेश
तुम्हारे गुरुजी महाराज
तुम्हारे सुंदर सरताज।
मृत्यु तो सच्चाई है
ना कि जीवन से बेवफ़ाई है
आत्मा शरीर बदलती है, चेतना शायद बदल लेती है लोक
सभी के सैंग ये होना है, फिर काहे का शोक?
गुरुजी हैं गुरु पूरण
उनसे जुड़ा हो जब जीवन
मिल जाये जो उनका साथ हर क्षण
तो मृत्यु भी है ऐसा नया जीवन
जो होगा अति सुंदर।
गुरुजी के प्रसाद से
कुछ जन जीते हुए भी होते हैं यूँ आज़ाद से
ये जीवन मुक्त कहलाते हैं
जो जीते जी मुक्ति पाते हैं।
जिसके करम हों जैसे
गुरुजी ही जानें कि वे कटवाने हैं उन्होंने कैसे
मुक्ति की ओर ले जाने के लिए
आत्मा को स्वयं में समाने के लिए।
जैसे भी जीवन का हर पल रहा है गुज़र
याद रखना होगा करते रहना गुरुजी का शुकर
बहुतों से अच्छे हैं हमारे हालात
ये है बिल्कुल पक्की बात।
और सब हो रहा है गुरुजी की निगरानी में
इस से ज़्यादा अच्छी बात हो नहीं सकती ज़िंदगानी में
यकीनन कई सारे लम्हे लगते हैं कठिन
अक्सर आँसू बहाते हुए भी गुज़र जाते हैं दिन
पर दिल में बसी रहती है गुरुजी की याद
बिन उन्हें कहे भी वे सुन रहे होते हैं फ़रियाद
ये सत्य कहीं ना कहीं देता है एक अद्भुत हिम्मत
ऐसा हौंसला जो देता है हर कदम पर सुमत
सब गुरुजी के आशीष से
उन्ही की बख़्शीश से।
सफ़र यूँ ही गुज़रता रहे गुरुजी की शरण में
ऐसी रूहानी कशिश है उनके चरण में
अमृत की धारा बहती है निरंतर वहाँ
आशीर्वाद के रूप में
रब स्वयं बसते हैं
गुरुजी के हर स्वरूप में
दिल को हर दुख और परेशानी से मिलती है राहत
पोषित हो जाती है गुरुजी को पाने की चाहत
जीते जी दिखता है यहाँ मुक्ति का द्वार
यूँ बरसती है गुरुजी की कृपा अपरम्पार।
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जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा
गुरुजी की कृपा अपरम्पार (04/02/2026)