अप्रैल ३, २०२६
ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏
# २९६६
पिछले जन्मों के कर्म
पिछले जन्मों के कर्म
यूँ आए इस जन्म में भी पीछे पीछे
कि दब गया जीने का उत्साह
प्रारब्ध के भार के नीचे।
जायें जिधर
वे भी आते हैं उधर
बनकर साया
बदलने हर योजना की काया।
सोचते क्या हैं
लेकिन क्या जाता है हो
अब तो इस अजब से खेल में
बस, गए हैं हम खो।
गुरुजी की शरण में है इसका उपाय
आओ जपते चलें ओम नमः शिवाय
ओम नमः शिवाय शिवजी सदा सहाय
जो जपे वो गुरुजी की दया पाये।
प्रारब्ध से बचना नामुमकिन है
पूरण गुरु के बिना ये और भी कठिन है
इसलिए शुक्र है मिली है गुरुजी की शरण
उनके चरणों में जो कट जायें प्रारब्ध करम
तो आसान हो जाएगा आत्मा का सफ़र
क्यूंकि सफ़र के हर कदम पर होगी गुरुजी की सुरक्षा
और जो सफ़र गुरुजी ने स्वयं है बख्शा
जब वे ख़ुद ही होंगे उसके संचालक
तो जिस तरह से प्रारब्ध कटवायेंगे वे प्रतिपालक
कोई नहीं कटवा सकता है उस तरह से कभी
आज या कल मान जायेंगे ये भक्त सभी।
उन्ही में हैं राम और साईं, उन्ही में अल्लाह
बस, अब कभी ना छूटे गुरुजी का पल्ला
आ जाये जो गुरुजी को प्रसन्न करने की कला
तो निश्चित है इस सफ़र में भला।
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जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा
पिछले जन्मों के कर्म (04/03/2026)