रूहानी राहों पर (04/07/2026)

अप्रैल ७, २०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# २९७०

           रूहानी राहों पर 

चलते हुए रूहानी राहों पर
मिला प्यारे गुरुजी का दर
शुक्र हुआ कि खिला नसीब
मालिक ने बुलाया अपने करीब।

हृदय में गुरुजी जो हुए विराजमान
तो भीतर उनका नाम हुआ प्रकाशमान
गुरुजी और उनके नाम से होने लगा प्यार
उनकी प्रीत से सजने लगा मेरा घर संसार।

देते हैं गुरुजी मार्गदर्शन भीतर से
आशीष देते हैं अपने रूहानी कर से
एकांत में नहीं होता अकेलापन
गुरुजी से जुड़ा रहता है मन।

मोह होने लगा है पहले से कम
लेकिन अभी तो चलने हैं सैंकड़ों कदम
जीवनमुक्ती की अवस्था की ओर
देना होगा आत्मबोध पर और भी ज़ोर।

गुरुजी जानें किस बोध के लिए कब होना है मुझे तैयार
शुक्र है उन्होंने थामी है मेरी नैया की पतवार
वरना डूब ही जाती
और कभी किनारा ना पाती।

किंतु अब उम्मीद के साथ है पूरा विश्वास
कि गुरुजी किनारे तक पहुँचायेंगे
सफ़र का हर पहलू वे ही संभालें
वे ही सोए भाग्य जगायेंगे।

एकांत हो या हो कोलाहल
गुरुजी की याद रहे पल पल
गुरुजी ही गुरुजी बसे रहें मेरी भावदृष्टि में सदा
कभी ना महसूस करूँ स्वयं को उनसे जुदा।

गुरुजी से ही प्रेरणा
गुरुजी से ही चेतना
गुरुजी से ही मेरा हर श्वास
और क्या हो सकता है इस से खास
गुरुजी के सदा मेरे अंग संग होने का रहे मुझे एहसास
करती हूँ गुरुजी से मैं अरदास।

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा

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