अप्रैल ११, २०२६
ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏
# २९७४
मन के असीम आसमान में
जीवन की दास्तान में
मन के असीम आसमान में
अनगिनत सोच विचार के बादल टहलते रहते हैं
और भीतर के नैन उन्हें देखते रहते हैं।
बादलों की भाँति ही
अक्सर कुछ विचार
इक दूजे में समा कर अस्तित्व खो देते हैं
और एक नए बादल रूपी विचार का रूप ले लेते हैं।
यूँ ही चलता जाता है सिलसिला
कि इक बादल दूजे किसी बादल से मिला
बादलों का रूप बदलता जाता है
आसमान सबको अपने आँचल में समाता है।
बादल कभी कभी जाते हैं बरस
विचार भी कर्म बन जाते हैं अक्सर
कभी बादल हो जाते हैं ओझल
आसमान बादलों से वंचित लगता है उस पल
जैसे विचारशून्य मन लागे उस क्षण
जब विचारहीनता बेपरवाही जाती है बन।
लेकिन कभी कभी जो बादल हो जाते हैं गर्भस्थ
मानो मन विचारों के चक्रव्यू में हो गया हो अस्वस्थ
बादल घने होकर काली घटा बन जाते हैं फिर
वैसे ही मन होता है अशांत और अस्थिर।
मन रूपी आसमान
मिटाए अपनी थकान
अनिवार्य है ये
ज़रूरी कार्य है ये
ताकि वह विचार रूपी बादलों को संभाल पाये
और उनके कारण वो अस्वस्थ ना हो जाये।
बहुत ज़्यादा सोचने से हो सकती है हानि
जिस साधक ने ये सच्चाई जानी और मानी
उसने चल लिया पहला कदम मन की स्थिरता की ओर
और इस स्थिरता में ही है साधक के लिए भोर।
एकाग्र कर स्वयं को गुरुजी के चिंतन में
अन्य विचारों के बादल कम होंगे मन में
बढ़ता रहेगा मन रूपी आसमान का बल
पहले से ज़्यादा स्थिर होता जाएगा उसका आँचल।
विचारों पर होने लगेगा मन का नियंत्रण
व्यर्थ की सोच होने लगेगी कम
जो विचार आयेंगे भी, उनसे नहीं बिगड़ेगा मन का संतुलन
गुरुजी के विचारों से खिलता रहेगा मन।
ऐसा मन रूपी आसमान कल्पना नहीं बल्कि है हकीकत
साधक को करना होगा निरंतर गुरुजी की याद में रहने का प्रयास
आइये, हम भी गुरुजी महाराज से करें अरदास
कि हमें केवल उनके विचार ही लागें खास
उन्ही में रमा रहे ये मन
तो बना रहेगा मन का संतुलन
मन में घर ना बना पायेंगे व्यर्थ के विचार
तो हर जन और जन के मन का हो जाएगा उद्धार।
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जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा
मन के असीम आसमान में (04/11/2026)