अप्रैल १२, २०२६
ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏
# २९७५
ज़रूरत है…
परम पूज्य गुरूवर,
ज़रूरत है निरंतर आपकी दया की नज़र की
ज़रूरत है निरंतर आपकी नदर की
रुक सी गई है गति सफ़र की
बहुत ज़रूरत है निरंतर आपकी मेहर की।
भीतर है ये एहसास
कि आपकी मेहर से ही चल रहा है श्वास
किंतु इतना सता रहा है मुश्किलों का तूफ़ान
कि दिखता नहीं इसके थमने का नामोनिशान
अब और सहा नहीं जाता है
मन चैन नहीं पाता है
आपकी चुप्पी सही नहीं जाती है
आपको देखकर आँख भर आती है।
आप तो सब कुछ करने में हैं समर्थ
कारज नहीं हो रहा, इसका ज़रूर होगा कोई अर्थ
आप जानते हैं वह कारण, और कोई नहीं
आप जानते हैं ये भी कि मैं कब से अच्छी नींद सोई नहीं।
मुझे इतनी परेशानी है, तो आप हाँगे मुझ से ज़्यादा परेशान
आख़िरकार, मैं हूँ आपकी संतान
जानती हूँ कि बहुत कमी है मेरी भक्ति में
ये भी जानती हूँ कि कोई कमी नहीं आपकी शक्ति में
क्यूँकि आप परमेश्वर हैं
आप सर्वेश्वर हैं।
ना जानूँ अगर मैं योग्य भी हूँ आपके प्यार और लाड़ की
इसलिए विनती ही समझ लीजिये अपनी इस औलाद की
आपने सदा संभाला है, मैं हूँ शुक्रगुज़ार
आप ही ले चलेंगे प्रारब्ध के भार के पार
बख़्श दीजिए, ओ बख़्शनहार
मदद कीजिए मेरी, ओ मददगार
मैं निमाणी, आप दानी
मैं पापी प्राणी, आप मेरे स्वामी।
मैं क्यों जाऊँ और कहीं
आपके दर पर हैं मेरे आसमाँ और ज़मीन
और मुझे है यकीन
कि मेरा कल्याण होगा यहीं,
आपके चरण में
आपकी शरण में
इसलिए झुका कर अपना सिर यहीं पर
आपसे माँगती हूँ श्रद्धा और सबर
वरना काँच की गुड़िया की भाँति मैं टूट कर बिखर ना जाऊँ कहीं
आपने अपने चरणों में स्थान दिया मुझे, अब कृपा कर मुझे रहने दीजियेगा यहीं।
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जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा
ज़रूरत है… (04/12/2026)