मई २२,२०२६
ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏
# ३०१५
ये दास्तान
ये दास्तान नहीं एक जन्म की
ये कहानी है कई जन्मों के हर कर्म की
पिछले कर्मों का क़र्ज़ चुकाने की
और सफ़र में आगे चलते जाने की।
मिल जाये जिसे गुरुजी जैसा गुरुवर
वो इस सफ़र में ज़रूर जाये तर
क्यूँकि गुरुजी के चरणों में हो जिसका जीवन बसर
गुरुजी के आशीर्वाद का हाथ होता है उसके सिर पर।
पूरण गुरु हैं गुरुजी महाराज
भक्तों को मोक्ष की ओर ले जाते हैं वे सरताज
उनकी जितनी संगत है आज
सभी के किसी ना किसी तरह से संवर रहे हैं काज।
इसका ये अर्थ कदापि नहीं
कि जो हो रहा है वो लगे सुखद और सही
पर दरअसल उसी से होगा कल्याण
क्यूँकि उसे निर्धारित कर रहे हैं गुरु करुणानिधान।
अनेकों जन्मों से बढ़ता जा रहा है कर्मों का जो भार
उसे हल्का करने में ऐसे सहायक हैं गुरुजी सरकार
कोई और कर सकता नहीं जैसे
कोई सोच ही नहीं सकता गुरुजी के जैसे।
गुरुजी महाराज की लीला है अपरंपार
अपनी लीला से वे करें भक्तों का उद्धार
कम करवायें भक्तों के कर्मों का भार
लेकर स्वयं पर अधिकतर भार इतनी बार।
गुरुजी की शरण में जारी रहे ये दास्तान
गुरुजी द्वारा होता रहेगा जो कल्याण
तो रूह कभी ना कभी राहत ज़रूर पाएगी
और गुरुजी की दिव्य ज्योत में अवश्य समाएगी।
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जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा
ये दास्तान (05/22/2026)