इस देर में छिपी सवेर (06/17/2026)

जून १७, २०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# ३०४१

      इस देर में छिपी सवेर 

इस देर में छिपी सवेर को ना पाऊँ पहचान
गुरुजी, आप ही दूर कीजिए मेरा अज्ञान
बँधी हूँ अनेकों पाशों में मैं निमानी
आप ही सम्भालिए मेरी ज़िंदगानी
मुझ में नहीं है इतनी भी काबिलियत
कि मैं बिन विकर्षण कर पाऊँ आपकी इबादत
देते रहिए मुझे हौंसला और हिम्मत
बख़्शते रहिए सुमत और पत
आपकी दया बिन
ये नहीं है मुमकिन
अब तो दिन और साल गिन गिन
ना जाने सिमरन के कितने पल गए छिन्न
सोचकर बातें भिन्न भिन्न
अपने पर होने लगी हूँ खिन्न
कि आपके ख़याल के अलावा दूजा कोई ख़याल आता ही क्यों है मेरे मन में
कि क्यों मुश्किल होता है ध्यान लगाना सिमरन में?
आपकी याद में रहूँगी जो मैं हर पल
तो कोई मुश्किल नहीं सतायेगी
आपके चरणों में सर्वसमर्पण कर दूँ
तो ज़िन्दगी आसान हो जाएगी
किंतु आपकी कृपा के बिन ये हो ना पाये
खड़ी हूँ आपके समक्ष झोली फैलाये
बख़्शिये ऐसी बुद्धि और मत
सर्वसमर्पण कर पाऊँ जिसके अंतर्गत
आपके कमल चरण में
आपकी कोमल शरण में।

आपने ही दिया ये शरीर
रूह तो है ही आपकी
ना मैं देह हूँ, ना मैं हूँ प्राण
ना हूँ मैं बुद्धि, ना मुझ में कोई ज्ञान
अंश हूँ आपका मैं, गुरुवर
आपसे ही शुरू हुआ सफ़र
आपकी गोद में ही हो बसर
आपकी करुणा की हूँ मोहताज
सदा अपनी मेहर-ए-नज़र रखना, मेरे सरताज।

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जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा

इस देर में छिपी सवेर (06/17/2026)

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