जुलाई २२, २०२६
ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏
# ३०७६
इस माजरे पर ज़रा फ़रमाना गौर
भोग भोगते भोगते
तृष्णा ना बढ़ती जाये
इसके लिए
सिमरन है श्रेष्ठ उपाय
जो गुरुजी ने है बख़्शा
करने के लिए हमारी रक्षा
ताकि हम फँसते ना जायें प्रपंच में
दुनिया के रंग मंच में।
वरना कमी नहीं आकर्षणों की
कमी नहीं विकर्षणों की
इस संसार में
घर परिवार में।
सिमरन मनोबल बढ़ाये
सिमरन ध्यान की ओर ले जाये
सिमरन मन की शुद्धि करे
सिमरन विवेक की वृद्धि करे।
रूह की पावन वृत्ति
यही है सिमरन की रीति
गुरुजी को याद कर के
उनकी याद से अंतस को भर के
दूर होते रहें दोष
मिले सम्पूर्ण संतोष
तो तृष्णा को ना मिलेगा स्थान
भीतर होने का विराजमान।
भोग से योग की स्थिति में
प्रवेश करना होगा आसान
क्यूँकि भीतर निरंतर होगा
गुरुजी का सिमरन और ध्यान।
पूरण गुरु हैं गुरुजी महाराज
ले जाने आए हैं भक्तों को ऊर्ध्वगति की ओर
हाथ से ना जाने देना ये सुनहरा अवसर
इस माजरे पर ज़रा फ़रमाना गौर।
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जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा
इस माजरे पर ज़रा फ़रमाना गौर (07/22/2026)