जुलाई २६, २०२६
ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏
# ३०८०
गुरुजी की बंदगी की दात
जिसे गुरुजी की बन्दगी की दात मिल गई
उसकी तो किस्मत खिल गई
दर मिल गया उसे गुरुजी के रूप में भगवान का
द्वार खुल गया उसके लिए कल्याण का।
पाकर गुरुजी की बंदगी
सँवर जाती है भक्त की ज़िंदगी
कितनों की सोयी क़िस्मत है जगी
पाकर गुरुजी की बख़्शिंदगी।
सेवा, सिमरन, सत्संग में है बंदगी
भाव के भोलेपन और नीवेंपन में बसती है बंदगी
अपनी ग़लतियों की शर्मिंदगी में और समर्पण में है बंदगी
बंदा बनने में है बंदगी।
बंदगी गुरुजी महाराज की
बीते कल की और आज की
और आने वाले कल की भी
जिसने भी शिद्दत से की
संवर गई उसकी गति
सुधर गई उसकी मती
कम करें उसके कर्मों का भार
स्वयं गुरुजी किरपाधार।
बंदगी से बिगड़े काम जायें बन
बंदगी से स्थिर और शांत हो जाए मन
बंदगी की दात है गुरुजी का दिया प्रसाद
इस दिव्य दात के लिए गुरुजी का धन्यवाद।
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जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा
गुरुजी की बंदगी की दात (07/26/2026)