नदिया बहे सागर की ओर (07/28/2026)

जुलाई २८, २०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# ३०८२

                                       नदिया बहे सागर की ओर 

नदिया बहे सागर की ओर
उसके लिए ना ही कोई और छोर
ना पत्थर ना कंकड़ में उसे रोकने की हिम्मत
ना तूफ़ान कर पाये उसे रोकने की ज़ुर्रत
सागर की ओर ही आकर्षित है नदिया का दिल
सागर ही है उसका स्रोत और मंज़िल।

गुरुजी महाराज की कृपा रहे
मेरा दिल भी उनकी ओर यूँ बहे
जैसे नदिया का सागर की ओर
ऐसे जुड़ी रहे गुरुजी से डोर
जीवन भर हर जनम में
रहूँ गुरुजी के कमल चरण में।

बहूँ वहीं, रहूँ वहीं
भाव वहीं, चाव वहीं
दिल वहीं, रूह वहीं
गुरुजी के कमल चरण में।

मेरी कोई बूंद भी तो मेरी नहीं
गुरुजी सागर, मैं उनके बिन कुछ भी नहीं
उन्ही में समाकर ही पूरी हो पाऊँगी
तब तक उनकी ओर बहती जाऊँगी
उनकी मेहरबानी से
उनकी निगरानी में
दिन रात निहारते हुए उनका सुहाना साथ
शुक्राना में जोड़े हुए अपने हाथ
गुरुजी में समाने की इंतज़ार में
बहती हुई उनके प्यार में।

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जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा

नदिया बहे सागर की ओर (07/28/2026)

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