अगस्त ८, २०२६
ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏
# ३०९३
सागर में डोलती नैया को जैसे…
सागर में डोलती नैया को जैसे
दिख गया हो किनारा
ऐसा लगा मुझे जब मिला मुझ नाचीज़ को
परम पूज्य गुरुजी महाराज का सहारा।
नैया को झेलने पड़े सागर में आए तूफ़ान
मेरे जीवन भी आते रहते हैं इम्तहान
कैसे बताऊँ, कैसे कैसे
उस नैया के जैसे।
जानती हूँ सबके जीवन का है अलग क़िस्सा
ख़ुशियों और गम ने बांटा हुआ है अपना अपना हिस्सा
पर जब से गुरुजी के बारे में मैने जाना
तब से अद्भुत हुआ ये अफ़साना।
सैंकड़ों तूफ़ान के बीच भी एक ठहराव
मन का हर पल गुरुजी की ओर बहाव
मुश्किलों के बावजूद विश्वास गहरा
कि गुरुजी का मुझपर सदा है पहरा।
गुरुजी के करीब होते जाना
गुरुजी महाराज को पाना
जीने का मक़सद गया बन
कहता है इस नैया का मन।
जानती हूँ कि मुझे गुरुजी को होगा रिझाना
गुरुजी ही बनायें मुझे इस क़ाबिल
वैसी बनती जाऊँ जैसा गुरुजी चाहें
आरज़ू करे ये दिल।
इसके लिए ज़रूरी है जैसा भाव
और चाहिए जैसा चाव
वो बख़्श दें गुरुजी महाराज करुणानिधान
मुझे नन्ही नाचीज़ नैया जान।
नैया की दौड़ किनारे तक
मेरी मेरे सहारे तक
गुरुजी महाराज हैं वो अखंड सहारा
मुझ नैया का शाश्वत किनारा।
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जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा
सागर में डोलती नैया को जैसे… (08/08/2026)