भक्ति की बगिया (08/17/2026)

अगस्त १७, २०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# ३१०२

                                भक्ति की बगिया 

जब से मैं गुरुजी से मिली
भक्ति की बगिया की हर कली खिली
बगिया में मंडराने वाली हर तितली
गुरुजी में मग्न हो हवा में डोलती चली।

कोई काँटा ना रहा संशय का
अँधेरा मिटने लगा भय का
होने लगा उम्मीद का उजाला
मन का मोर हुआ मतवाला।

वायु लायी वहाँ विश्वास
गुरुजी के दीदार की बढ़ने लगी आस
आसमाँ ने बरसायी मीठी प्यास
गुरुजी के सत्संग और सिमरन की
जिस से रूहानी लगन बढ़ी
रूह और तन मन की।

आया वह शुभ सुंदर दिन
जब गुरुजी ने स्वयं दिए दर्शन
हवायें झूमने लगीं
अप्सराएँ भी आ घूमने लगीं
बगिया के फूल लगे मुस्कुराने
गुरुजी की ख़ुशबू के हुए वे दीवाने
देवी देवताओं का भी हुआ आगमन
रोशन हुए धरती गगन
चारुल लगने लगा चमन
मैं गुरुजी को देख उस क्षण
हुई यूँ भावविभोर
कि देख ही ना पायी कहीं और।

पहले तो यकीन ही नहीं हुआ
फिर गुरुजी का स्पर्श हुआ
उन्होंने मेरे सिर पर रखा हाथ
मैं झुक गई उनके कमल चरण में
मैं भक्ति की बगिया में हूँ गुरुजी के साथ
ये जान कर अनेकों शुभ भाव आए मेरे मन में।

कर के देवी देवताओं को नमस्कार
कर के अप्सराओं का स्वागत
गुरुजी की और आकर्षित हुई मैं और मेरा प्यार
अपनी किस्मत को सराहा कि हुआ मुझे ये दीदार।

मेरी आँखों में थे आँसू
पर प्रसन्न थी मेरी रूह
अपने मालिक को देख कर
जिनके चरणों में झुका था मेरा सिर।

इतने सुंदर गुरुजी के चरण
जिनकी सेवा उन्होंने बख्शी
मेरे पास बताने के लिए अल्फ़ाज़ नहीं
कि मुझे हुई कितनी ख़ुशी।

करते करते गुरुजी का शुक्राना
मैं तो गाने लगी उनकी स्तुति में गाना
इतने प्रेम से सुना मेरे गुरुजी महाराज ने
प्यारी सी मुस्कान दी मेरे सुंदर सरताज ने।

मेरे देखते ही देखते
गुरुजी हुए अंतर्धान
सभी देवी देवता अप्सराएँ भी हुए ओझल और अदृश्य
लेकिन देखने वाला था भक्ति की बगिया का दृश्य
गुरुजी के प्रताप से उसका नूर हुआ अनोखा
गुरुजी का शुक्राना कि उन्होंने मुझे दिया ये अनुग्रहित मौक़ा।

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जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा

भक्ति की बगिया (08/17/2026)

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