चेतना का एकाकार (04/14/2026)

अप्रैल १४, २०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# २९७७

        चेतना का एकाकार 

एक ही चेतना के स्वरूप हैं हम
बस, अलग अलग शरीर में लेते हैं जनम
लेकिन जब तक अहंकार ना हो जाये चूर चूर
तब तक महसूस करते रहेंगे स्वयं को इक दूजे से दूर।

यही तो है राज़ भीतर की निशा का
चाहिए दरस दिशा का
गुरुजी दिखा रहे हैं दिशा
जिसकी ओर चल कर मिट जाएगी ये निशा।

यूँ हो जाये गुरुजी और उनकी याद से प्यार
कि कोई प्रतिकूल ख़याल हो ही ना स्वीकार
ख़ुद की ख़ामियों की ओर जागृत करे गुरबानी
स्वयं सुधार में बीतने लगे ज़िंदगानी।

सार्वभौम चेतना की अभिन्नता
देखना और जान-ना शरीर के पार
मान-प्रतिष्ठा के पार, माया के पार
इसके लिए अनिवार्य है गुरुजी की कृपा अपरंपार
वरना जन्म मरण भोगना पड़ेगा बारम्बार
इसलिए गुरुजी से अरदास है बार बार
कि उनकी कृपा से आए वो कल
जब चेतना का सूरज हो इतना प्रबल
कि उनका रूप सब में दिख जाये बाहरी रूप के पार
और चेतना का एकाकार हो पाये स्वीकार।

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जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा

चेतना का एकाकार (04/14/2026)

तो फिर किस बात का गम है? (04/13/2026)

अप्रैल १३, २०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# २९७६

             तो फिर किस बात का गम है?

तुम्हारे साथ हैं गुरुजी
तो फिर किस बात का गम है?
तुम्हारे नाथ हैं गुरुजी
तो फिर किस बात का गम है?
जानें बात हर गुरुजी
तो फिर किस बात का गम है?
हरि भी, हर भी हैं गुरुजी
तो फिर किस बात का गम है?

तुम्हारी राहों पर हर पल
गुरुजी की होती है नज़र
वे तो सर्वज्ञानी हैं
बरसाते हैं वे नदर
मेहर बरसाते हैं गुरुजी
तो फिर किस बात का गम है?
तुम्हारे साथ हैं गुरुजी
तो फिर किस बात का गम है?

जानो तुम या ना जानो
गुरुजी जानें सब कुछ ही
जो कही भी हो ना उनसे
वे तो जानते हैं वो भी
ख़ुद भगवान हैं गुरुजी
तो फिर किस बात का गम है?
तुम्हारे साथ हैं गुरुजी
तो फिर किस बात का गम है?

तुम तो डूब ही जाते
उन्होंने ही बचाया है
तुम गिर भी गए जब जब
उन्होंने ही उठाया है
रक्षा करते हैं गुरुजी
तो फिर किस बात का गम है?
तुम्हारे साथ हैं गुरुजी
तो फिर किस बात का गम है?

ना भूलो करना उनका शुक्र
उन्होंने हर श्वास है दिया
तुम्हारी गलतियों के लिए
तुम्हें माफ़ भी है किया
बख्शनहार हैं गुरुजी
तो फिर किस बात का गम है?
तारनहार हैं गुरुजी
तो फिर किस बात का गम है?
तुम्हारे साथ हैं गुरुजी
तो फिर किस बात का गम है?
तुम्हारे नाथ हैं गुरुजी
तो फिर किस बात का गम है?

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जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा

तो फिर किस बात का गम है? (04/13/2026)

ज़रूरत है… (04/12/2026)

अप्रैल १२, २०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# २९७५

              ज़रूरत है…

परम पूज्य गुरूवर,

ज़रूरत है निरंतर आपकी दया की नज़र की
ज़रूरत है निरंतर आपकी नदर की
रुक सी गई है गति सफ़र की
बहुत ज़रूरत है निरंतर आपकी मेहर की।

भीतर है ये एहसास
कि आपकी मेहर से ही चल रहा है श्वास
किंतु इतना सता रहा है मुश्किलों का तूफ़ान
कि दिखता नहीं इसके थमने का नामोनिशान
अब और सहा नहीं जाता है
मन चैन नहीं पाता है
आपकी चुप्पी सही नहीं जाती है
आपको देखकर आँख भर आती है।

आप तो सब कुछ करने में हैं समर्थ
कारज नहीं हो रहा, इसका ज़रूर होगा कोई अर्थ
आप जानते हैं वह कारण, और कोई नहीं
आप जानते हैं ये भी कि मैं कब से अच्छी नींद सोई नहीं।

मुझे इतनी परेशानी है, तो आप हाँगे मुझ से ज़्यादा परेशान
आख़िरकार, मैं हूँ आपकी संतान
जानती हूँ कि बहुत कमी है मेरी भक्ति में
ये भी जानती हूँ कि कोई कमी नहीं आपकी शक्ति में
क्यूँकि आप परमेश्वर हैं
आप सर्वेश्वर हैं।

ना जानूँ अगर मैं योग्य भी हूँ आपके प्यार और लाड़ की
इसलिए विनती ही समझ लीजिये अपनी इस औलाद की
आपने सदा संभाला है, मैं हूँ शुक्रगुज़ार
आप ही ले चलेंगे प्रारब्ध के भार के पार
बख़्श दीजिए, ओ बख़्शनहार
मदद कीजिए मेरी, ओ मददगार
मैं निमाणी, आप दानी
मैं पापी प्राणी, आप मेरे स्वामी।

मैं क्यों जाऊँ और कहीं
आपके दर पर हैं मेरे आसमाँ और ज़मीन
और मुझे है यकीन
कि मेरा कल्याण होगा यहीं,
आपके चरण में
आपकी शरण में
इसलिए झुका कर अपना सिर यहीं पर
आपसे माँगती हूँ श्रद्धा और सबर
वरना काँच की गुड़िया की भाँति मैं टूट कर बिखर ना जाऊँ कहीं
आपने अपने चरणों में स्थान दिया मुझे, अब कृपा कर मुझे रहने दीजियेगा यहीं।

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जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा

ज़रूरत है… (04/12/2026)

मन के असीम आसमान में (04/11/2026)

अप्रैल ११, २०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# २९७४

  मन के असीम आसमान में

जीवन की दास्तान में
मन के असीम आसमान में
अनगिनत सोच विचार के बादल टहलते रहते हैं
और भीतर के नैन उन्हें देखते रहते हैं।

बादलों की भाँति ही
अक्सर कुछ विचार
इक दूजे में समा कर अस्तित्व खो देते हैं
और एक नए बादल रूपी विचार का रूप ले लेते हैं।

यूँ ही चलता जाता है सिलसिला
कि इक बादल दूजे किसी बादल से मिला
बादलों का रूप बदलता जाता है
आसमान सबको अपने आँचल में समाता है।

बादल कभी कभी जाते हैं बरस
विचार भी कर्म बन जाते हैं अक्सर
कभी बादल हो जाते हैं ओझल
आसमान बादलों से वंचित लगता है उस पल
जैसे विचारशून्य मन लागे उस क्षण
जब विचारहीनता बेपरवाही जाती है बन।

लेकिन कभी कभी जो बादल हो जाते हैं गर्भस्थ
मानो मन विचारों के चक्रव्यू में हो गया हो अस्वस्थ
बादल घने होकर काली घटा बन जाते हैं फिर
वैसे ही मन होता है अशांत और अस्थिर।

मन रूपी आसमान
मिटाए अपनी थकान
अनिवार्य है ये
ज़रूरी कार्य है ये
ताकि वह विचार रूपी बादलों को संभाल पाये
और उनके कारण वो अस्वस्थ ना हो जाये।

बहुत ज़्यादा सोचने से हो सकती है हानि
जिस साधक ने ये सच्चाई जानी और मानी
उसने चल लिया पहला कदम मन की स्थिरता की ओर
और इस स्थिरता में ही है साधक के लिए भोर।

एकाग्र कर स्वयं को गुरुजी के चिंतन में
अन्य विचारों के बादल कम होंगे मन में
बढ़ता रहेगा मन रूपी आसमान का बल
पहले से ज़्यादा स्थिर होता जाएगा उसका आँचल।

विचारों पर होने लगेगा मन का नियंत्रण
व्यर्थ की सोच होने लगेगी कम
जो विचार आयेंगे भी, उनसे नहीं बिगड़ेगा मन का संतुलन
गुरुजी के विचारों से खिलता रहेगा मन।

ऐसा मन रूपी आसमान कल्पना नहीं बल्कि है हकीकत
साधक को करना होगा निरंतर गुरुजी की याद में रहने का प्रयास
आइये, हम भी गुरुजी महाराज से करें अरदास
कि हमें केवल उनके विचार ही लागें खास
उन्ही में रमा रहे ये मन
तो बना रहेगा मन का संतुलन
मन में घर ना बना पायेंगे व्यर्थ के विचार
तो हर जन और जन के मन का हो जाएगा उद्धार।

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जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा

मन के असीम आसमान में (04/11/2026)

कर लो तय (04/10/2026)

अप्रैल १०, २०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# २९७३

              कर लो तय 

कर लो तय
कि हो जाओगे गुरुमय
मिट जाएगा भय
मिट जाएगा संशय
जीवन में आएगी ऐसी लय
कि रहोगे गुरुजी में तन्मय।

गुरुजी में तन्मय रहना ही है उपाय
अगर चाहते हो कि कोई कष्ट ना सताय
क्यूंकि कष्ट तो आयेंगे जीवन में
कुछ वक्त लेंगे, कुछ कटेंगे क्षण में
पर जब तक मग्न रहोगे गुरुजी के चिंतन में
कोई भी प्रतिक्रिया घर नहीं बना पाएगी तुम्हारे मन में।

बहते पानी की भाँति कष्ट आकर बह जायेंगे
तुम्हारी हिम्मत और सहनशीलता को कम ना कर पायेंगे
गुरुजी में तन्मय रहकर तुम्हारा मनोबल रहेगा सलामत
चाहे आ जाये जीवन में बड़ी से बड़ी क़यामत।

इसलिए दृढ़ कर लो निश्चय
कि गुरुजी में रहना है तन्मय
ताकि बेशक आ जाये प्रलय
तुम होगे निर्भय।

गुरुजी से करो अरदास
कि तुम्हारे हर श्वास में हो उनका निवास
गुरुजी देंगे तुम्हें अभय दान
तुम बस, उनका कहना लो मान।

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जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा

कर लो तय (04/10/2026)

तेरे भीतर (04/09/2026)

अप्रैल ९, २०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# २९७२

                 तेरे भीतर

सनातन सुख है तेरे भीतर
तू उसे स्वीकार कर
कर उसका आलिंगन
शांत हो जाएगा तेरा मन।

मन को करने के लिए शांत
बहुत ज़रूरी है एकांत
गुरुजी संग वक्त गुज़ार
वे ही करायेंगे भवसागर से पार।

ज़रूरत नहीं कोई अल्फ़ाज़ कहने की
ज़रूरत है बस गुरुजी के चिंतन में रहने की
मन ही मन में उनसे होती रह सकती है बात
क्यूंकि मालिक तो सदा हैं साथ
ये सनातन सुख नहीं तो और क्या है
ये गुरुजी की ही दया है।

गुरुजी की दया का कर सत्कार
एक वे ही करते हैं तुझसे निस्वार्थ प्यार
मन में जितना बसने देगा तू संसार
उतना ही तड़पेगा तू बार बार
गुरुजी को बसा लिया जो मन में
तो और कोई नहीं चाहिए जीवन में
बाक़ी सब केवल फ़र्ज़ है, इक क़र्ज़ है
हर पल उसे अदा करता चल
और गुरुजी में मन को मग्न कर
सनातन सुख को पा अपने भीतर।

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जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा

तेरे भीतर (04/09/2026)

…वही है मेरे लिए सही गुरुजी (04/08/2026)

अप्रैल ८, २०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# २९७१

 …वही है मेरे लिए सही गुरुजी 

दे दो भक्ति का दान, गुरुजी
अपने में लीन करो मेरे प्राण, गुरुजी
ये प्राण दिए हैं आप ने
ना गँवाऊ इन्हें दुख संताप में
इनसे लेती रहूँ मैं आपका नाम, गुरुजी
प्राणों का हो कल्याण, गुरुजी।

प्यारा लागे आपका धाम, गुरुजी
वहाँ रूह को मिले आराम, गुरुजी
अंश आप ही का तो है ये रूह
अपनापन महसूस करती है जब आपका स्पंदन लेता है छू
उसे आप में समाने का रहता है इंतज़ार, गुरुजी
कोशिश करने से ये ना माने हार, गुरुजी।

दिल चाहे आपसे बातें करते रहना का, गुरुजी
दिल चाहे सदा आपके प्रेम में बहने का, गुरुजी
होता है आपके अमृत का पान
तो मिट जाती है हर थकान
आप महासागर महान, गुरुजी
मैं नदिया, नन्ही और नादान, गुरुजी।

आपके हुक्म में रहूँ, गुरुजी
आपकी आज्ञा में बहूँ, गुरुजी
आपकी प्रेरणा के प्रकाश से दूर होता रहे मेरा अँधेरा
आपकी संवेदना के सूरज से रोशन रहे मेरा सवेरा
आप सागर बेअंत, मैं बूँद बनने के क़ाबिल भी नहीं, गुरुजी
आप जो भी कर रहे हैं, गुरुजी, वही है मेरे लिए सही, गुरुजी।

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जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा

…वही है मेरे लिए सही गुरुजी (04/08/2026)

रूहानी राहों पर (04/07/2026)

अप्रैल ७, २०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# २९७०

           रूहानी राहों पर 

चलते हुए रूहानी राहों पर
मिला प्यारे गुरुजी का दर
शुक्र हुआ कि खिला नसीब
मालिक ने बुलाया अपने करीब।

हृदय में गुरुजी जो हुए विराजमान
तो भीतर उनका नाम हुआ प्रकाशमान
गुरुजी और उनके नाम से होने लगा प्यार
उनकी प्रीत से सजने लगा मेरा घर संसार।

देते हैं गुरुजी मार्गदर्शन भीतर से
आशीष देते हैं अपने रूहानी कर से
एकांत में नहीं होता अकेलापन
गुरुजी से जुड़ा रहता है मन।

मोह होने लगा है पहले से कम
लेकिन अभी तो चलने हैं सैंकड़ों कदम
जीवनमुक्ती की अवस्था की ओर
देना होगा आत्मबोध पर और भी ज़ोर।

गुरुजी जानें किस बोध के लिए कब होना है मुझे तैयार
शुक्र है उन्होंने थामी है मेरी नैया की पतवार
वरना डूब ही जाती
और कभी किनारा ना पाती।

किंतु अब उम्मीद के साथ है पूरा विश्वास
कि गुरुजी किनारे तक पहुँचायेंगे
सफ़र का हर पहलू वे ही संभालें
वे ही सोए भाग्य जगायेंगे।

एकांत हो या हो कोलाहल
गुरुजी की याद रहे पल पल
गुरुजी ही गुरुजी बसे रहें मेरी भावदृष्टि में सदा
कभी ना महसूस करूँ स्वयं को उनसे जुदा।

गुरुजी से ही प्रेरणा
गुरुजी से ही चेतना
गुरुजी से ही मेरा हर श्वास
और क्या हो सकता है इस से खास
गुरुजी के सदा मेरे अंग संग होने का रहे मुझे एहसास
करती हूँ गुरुजी से मैं अरदास।

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा

सफ़र का क़िस्सा (04/06/2026)

अप्रैल ६, २०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# २९६९

          सफ़र का क़िस्सा

कोई दर्द को समेट कर
कोई दर्द से बिखर कर
पहुंचता है गुरुजी के दर पर
ताकि गुरुजी की हो जाये नदर।

गुरुजी अंतर्यामी हैं
वे सृष्टि के स्वामी हैं
कब और कैसे होनी है किसपर उनकी नदर
ये जानते हैं केवल गुरुवर।

गुरुजी हैं हमदर्द मेहरबान
सारी संगत ही है उनकी संतान
पर सबके अलग होते हैं इम्तहान
बेशक सबकी मंजिल की है एक सी पहचान।

दर्द सहना कहाँ है आसान
पर अनिवार्य हो जाता है सहनशीलता का इम्तहान
रूहानी ऊँचायी की सीढ़ी चढ़ने के वास्ते
इसलिए दर्द के साथ और भी मुश्किलों से भरे होते हैं अक्सर रास्ते।

आखिरकार, निभानी है अगर भूमिका भक्ति की
तो परीक्षा देनी होगी सहनशक्ति की
और कई अन्य परीक्षाएं भी उसके संग
तभी तो गहरा होगा भक्ति का रंग।

ना जीवन स्थायी है ना ये संसार
ना दर्द हमेशा रहेगा ना ये शरीर
पर जो भक्ति की भूमिका निभा लेगा अच्छे से
संवर जाएगी उसकी आत्मा की तक़दीर।

और आत्मा तो स्थायी है
गुरुजी का है ये हिस्सा
क्यों ना अपनी पूरी कोशिश से
संवारें इसके सफ़र का किस्सा?

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा

सफ़र का क़िस्सा (04/06/2026)

सुकून मिलेगा ज़रूर (04/05/2026)

अप्रैल ५, २०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# २९६८

         सुकून मिलेगा ज़रूर

गुरुजी दे रहे हैं शिक्षा तुम्हें
समय और अनुभवों के माध्यम से
तुम सीखते चलो
उनकी रहमत और अपने श्रम से।

किताबी ज्ञान अपनी जगह है
किंतु अनिवार्य है अनुभव ज्ञान
बाहरी और भीतरी
रखते हुए सफ़र को जारी।

दुनिया में रहते हुए
गुरुजी से जुड़े रहना
भवसागर में तैरते हुए
तुम उनके प्रेम रस में डूबे रहना।

उनकी याद के नशे में होकर मस्त
उनके बख्शे सेवा, सिमरन, सत्संग में रहना व्यस्त
बेशक हो जाओ चुनौतियों से ग्रस्त
गुरु चरणों में झुक कर जोड़े रहना अपने हस्त।

गुरुजी के चरणों में पाओगे हर उलझन की सुलझन
गुरुजी के चरणों में हल्का कर पाओगे मन
देख लो कोशिश कर के किसी और के पास
चंद लम्हों में मन हो जाएगा दोबारा विचलित और उदास
किंतु गुरुजी के चरणों में मन को मिलेगी दीर्घकालिक राहत
वहीं मिलेगा वो मार्गदर्शन जिसकी तुम्हारे अंतस् को है चाहत।

क्यूंकि ये है रूह से रूह की बात
दुनियावी बातों से बिल्कुल बहुत दूर
और स्वयं परमात्मा हों जब तुम्हारे साथ
तो उनके चरणों में सुकून मिलेगा ज़रूर।

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा

सुकून मिलेगा ज़रूर (04/05/2026)