साधारण सा इक जन… (08/28/2026)

अगस्त २८, २०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# ३११३

                                  साधारण सा इक जन…

साधारण सा इक जन था
सादा सा उसका जीवन था
पर भवसागर की लहरें सभी को लपेट लेती हैं
सभी को मोह माया में समेट लेती हैं
ऐसा ही कुछ हुआ जन के साथ
गुरुजी थे जिसके नाथ।

जैसे जैसे आगे बढ़ा उसका सफ़र
गुरुजी की होती रही उसपर नदर
गुरुजी से बढ़ने लगी नज़दीकियाँ रूहानी
प्राथमिकताएँ बदलने लगी उसकी ज़िंदगानी।

जीते जीते प्रपंच में
दुनिया के रंग मंच में
दुनिया से मन था ऊबता गया
गुरुजी की याद में डूबता गया
ना रह गई और कोई सुध बुध
मन का भाव होता गया शुद्ध।

गुरुजी ने उसे किया तैयार
ताकि वह हकीकत कर पाये स्वीकार
बिना किसी से रूठे
बिना ख़ुद ही टूटे
जानकर और मानकर नियति और कर्मों का रुख़
और पहले मुश्किल लगा, पर फिर कम होता गया इन बातों का दुख।

क्यूँकि गुरुजी से रिश्ता गहरा होता गया
वह गुरुजी की याद में खोता गया
दुविधाएं गई सुलझ
आ गया उसे समझ
कि सादगी और सरलता में है असल सुख
गुरु कृपा से वह बनता चला गुरुमुख।

ज़िन्दगी गई संवर
चलता रहा उसका सफ़र
गुरुजी से जुड़ाव में
भक्ति के भोले भाव में।

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा

साधारण सा इक जन… (08/28/2026)

महक सबसे खुशबूदार गुलाब की… (08/27/2026)

अगस्त २७, २०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# ३११२

                                     महक सबसे खुशबूदार गुलाब की…

महक सबसे खुशबूदार गुलाब की
रोशनी आसमान के आफताब की
लागे फीकी गुरुजी महाराज के सामने
ऐसी लीला है उनके प्रताप की
जिनकी रूहानी खुशबू
तार देती है भक्तों की रूह
जिनका दिव्य नूर
करता है हर अँधेरा दूर।

सबकी रूहों के मालिक हैं
परम पूज्य परमात्मा स्वयं
ऐसी है मेरे स्वामी की मुस्कुराहट
कि शरमाये सृष्टि की हर मुस्कान
और झुक जाये गुरुजी के कमल चरण में
जगह पाने उनकी शरण में।

भूलोक से लेकर परमधाम
जपते हैं गुरुजी का नाम
उनके चरणों में है हर तीरथ धाम
होता है यहाँ सदा कल्याण।

प्रेम है गुरुजी का पावन इतना
कोई इंसान ना कर पाये उतना
शुभचिंतक हैं सारी संगत के
चित्रकार हैं भक्तों की रूहानी रंगत के
इस रंग का करें सम्मान
हमें मिली है अमृत की ख़ान
किस्मत वालों को मिलता है इसका पान
क्यूँकि इसके दाता हैं स्वयं भगवान।

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा

महक सबसे खुशबूदार गुलाब की… (08/27/2026)

तन्मय होकर… (08/26/2026)

अगस्त २६, २०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# ३१११

                        तन्मय होकर…

तन्मय होकर कर ले चिंतन
विनम्र भाव से कर ले वंदन
गुरुजी महाराज मेहरबान का
सदाशिव करुणानिधान का।

भटकना छोड़ दे इधर उधर
क्यूँकि गुरुजी ले जायेंगे जिधर
वही दिशा सबसे बेहतरीन
इसलिए गुरुजी में रह तल्लीन।

दुनियावी रिश्ते हैं व्यापार
नश्वर है पदार्थों का संसार
इन सबसे मोहित होकर ना बढ़ने दे विकार
विषयों को ना बनने दे जीने का आधार।

भीतर से जोड़े रख गुरुजी से रूहानी तार
आसान हो जायेंगे बिताने यहाँ पर दिन दो चार
और गुरुजी की कृपा से होता चल आगे के लिए तैयार
ताकि तेरा यह जनम ना जाये बेकार।

गुरुजी ने तुझे भेजा है यहाँ
देने कर्मों के इम्तहान
रूहानी उन्नति के लिए
जलाकर शुद्धि और विवेक के दिए।

गुरुजी को जो चेतेगा तेरा चित्त
तो इसमें है तेरा हित
पाप धुलेंगे, कष्ट क्लेश जायेंगे मिट
सिमरन और ध्यान को कर तू विकसित।

समझ चुका है तेरा दिल
कि तेरी रूह है बहुत क़ाबिल
सहयोग दे उसे आगे बढ़ने में
उन्नति की सीढ़ियाँ चढ़ने में।

बेशक तेरी नीयत और तेरे व्यवहार में हो पूरी शिद्दत
दुनिया को तुझसे हमेशा होगी कोई ना कोई शिकायत
इसलिए उन गुरुजी महाराज की कर इबादत
जो सदा अपने चरणों में करेंगे तेरा स्वागत
तुझे मानकर और जानकर अपना बच्चा
क्यूँकि एक यही रिश्ता है सच्चा।

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा

तन्मय होकर… (08/26/2026)

फ़िक्र (08/25/2026)

अगस्त २५, २०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# ३११०

                             फ़िक्र 

इंसान अक्सर फ़िक्र में खोता है
जब कि वह जानता है कि फ़िक्र करने से कुछ नहीं होता है
बल्कि कुछ होता भी है तो वो है हानि मानसिक या शारीरिक संतुलन की
और जीवन बसर करने में रुकावट बनती है स्थिति मन की
रूहानी उन्नति पर भी होता है असर
हो नहीं पाते हम अग्रसर।

काम तो बनेगा सही वक़्त आने पर ही
ये जानते हैं सभी
और इच्छा ना पूरी हो तो वो कल्याण नहीं
नादानी और अज्ञानता है ऐसा सोचना भी
ज़रूरी तो है कर्म काटने भी
आज या कल, कभी ना कभी।

पूर्ण गुरु हैं गुरुजी महाराज
करते हैं सम्पूर्ण कल्याण
इसलिए पूर्ण रूप में करना होगा उन्हें समर्पण
अक्सर हमें मुश्किल लगता है ये काम
लेकिन ये जो हम कर पायें
तो बेफिक्र हो जायें।

ऐसी आस्था से सजाना होगा रास्ता
जो गुरुजी दिखा रहे हैं
होनहार विद्यार्थी बनकर सीखना होगा
हर पाठ जो गुरुजी सिखा रहे हैं।

जब भी फिक्र होने लगे
कर लें गुरुजी का जाप उसी समय
गुरुजी की याद से अंतस को भर लें
ताकि वहाँ आने के लिए जगह ना पाये फ़िक्र या संशय।

फ़िक्र का बादल अंतस् के आसमान में टहल कर ओझल हो जाएगा
अंतस् का आसमान उसे गुरुजी के नाम से आवरणित कर पायेगा
इस सफ़र में बेफिक्र होना है ज़रूरी
वरना बढ़ जाएगी गुरुजी से दूरी
इसलिए ध्यान रहे कि फ़िक्र कर के ना बनें नादान
फ़िक्र ना ले कभी भी गुरुजी के चिंतन का स्थान
कोशिश करें कि गुरुजी से जोड़े रहें रूहानी तार
गुरुजी करेंगे अपनी कृपा से समय आने पर सबका उद्धार।

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा

फ़िक्र (08/25/2026)

बंदगी का ये सुंदर बंधन (08/24/2026)

अगस्त २४, २०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# ३१०९

                                        बंदगी का ये सुंदर बंधन 

गुरुजी महाराज, सदाशिव के रूप
गुरुजी महाराज की लीला अनूप
गुरुजी की कृपा से ही छाओं और धूप
सभी के भीतर बसे उनका स्वरूप
फिर क्यों भूल जाते हैं अक्सर सब
कि भीतर हमारे बसते हैं वे रब
ढूँढते रहते हैं बाहर उन्हें ज़्यादातर
और माथा टेकते हैं दर दर पर।

गुरुजी महाराज में देवी देवता सब हैं
गुरुजी महाराज स्वयं रब हैं
उनकी लीला है इंसानी सोच और तर्क-वितर्क के पार
संकट मोचन हैं वे, संभालते हैं सारा संसार
आज तक उनका आदि और अंत कोई ना जान पाया
हर ब्रह्मांड गुरुजी महाराज में है समाया।

वे त्यागी, रसिक बैरागी हैं स्वयं
किंतु अपने भक्तों को भोग के रास्ते से ले जाते हैं
जैसे जिसके कर्म और जैसा जिसका कल्याण
वैसे वैसे वे गुरुजी की कृपा से मोक्ष पाते हैं।

अनासक्ति का पाठ भी गुरुजी पढ़ाते हैं
बंदा बनना भी सिखाते हैं
रूहानी उन्नति का रास्ता दिखाते हैं
गुरुजी पुरुषार्थ पूरा कराते हैं।

गुरुजी से जुड़ाव
गुरुजी से लगाव
और भक्त जो उनमें खोता है
ये भी उनकी कृपा से ही होता है
इसलिए ये स्वयं में है संकेत ख़ुशक़िस्मती का
ये ख़ुद में है लक्षण भविष्य में सद्गति का।

गुरुजी के मनन और स्तवन में गुज़र जाये जिसका जीवन
बहुत खुशनसीब होता है वह जन
तर जाती है उसकी आत्मा और उसका तन मन
पूर्ण रूप से कल्याणकारी है बंदगी का ये सुंदर बंधन।

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जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा

बंदगी का ये सुंदर बंधन (08/24/2026)

…बन कर अबोध (08/23/2026)

अगस्त २३, २०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# ३१०८

                                   …बन कर अबोध 

यहाँ आते हैं सब बन कर अबोध
अनिवार्य है करना यहाँ आकर आत्म-बोध
ये जानने और स्वीकारने में ही बीत जाता है जीवन
इसमें सबसे बड़ी बाधा अक्सर बनता है अपना ही मन
इसलिए कल्याण के लिए ज़रूरी है आध्यात्मिक जागरण
जिसके लिए करते रहना होगा गुरु गोविन्द का मनन।

करनी होगी बुद्धि की दिशा आत्मा की ओर
करनी होगी मन की दिशा परमात्मा की ओर
मन को एकाग्र करना ही है एकमात्र उपाय
जिसमें गुरुजी का नाम और मंत्र है सदा सहाय
गुरुजी स्वयं रूप हैं भगवान का
और मन में दीप जलाकर उनके नाम का
जागरूक के साथ साथ होना होगा सजग
वरना यह मोह माया और यह जग
और यहाँ के आकर्षण
बनेंगे ऐसे विकर्षण
कि स्थिर ना हो पायेगा मन
और बिन असल चीज़ पाये गुज़र जाएगा जीवन।

प्राप्त और पर्याप्त के बीच का ही तो है ये सफ़र
उसकी होगी फ़तह जिसका मन होगा शांत और स्थिर
जिसका मन गुरुजी की याद की ओर मुड़ा रहेगा
जिसका मन गुरुजी के वचन रूपी चरण से जुड़ा रहेगा
जिसका होगा गुरुजी को आत्मा-समर्पण
गुरुजी का सानिध्य सदा पायेगा वह जन
बेशक जिस भी युग के जैसे भी हालात से घिरे होंगे धरती गगन
वह जन सफल होगा रहकर गुरुजी की लगन में मगन।

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जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा

…बन कर अबोध (08/23/2026)

हर इम्तहान के लिए… (08/22/2026)

अगस्त २२, २०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# ३१०७

                               हर इम्तहान के लिए…

हर इम्तहान के लिए
हर परिणाम के लिए
सही होता है गुरुजी का निर्धारित समा
इसलिए, ओ राही, तू ना घबरा।

ऐसा ही होता आया है
ऐसा ही होगा सदा
गुरुजी की अनोखी लीला है
कल्याणमयी है उनकी हर अदा।

वे जानें क्या सबके लिए अच्छा है और कब
उनपर छोड़ देगा तो वे सब करेंगे तब
जब उन्हें लगेगा सही
इसमें कोई भी शक नहीं।

वैसे भी कुछ नहीं है तेरे हाथ में
और सबसे बड़ी बात, गुरुजी हैं तेरे साथ में
ऐसा साथ मिलता है क़िस्मत वालों को
इसलिए व्यर्थ ना समझ इन गुज़रे हुए सालों को।

गुरुजी ने तेरे इस बीते समय में काटे हैं ना जाने तेरे कौन कौनसे कर्म
ना तू जान सकता है ना ही तुझे होंगे सब स्मरण
ना ही है तुझ में उन्हें स्वयं काटने की या भोगने की काबिलियत
इसलिए तू तो माफ़ी माँगकर शुकराना में रह कर करता चल उनकी इबादत।

आस में रख विश्वास
व्यर्थ ना गवां सिमरन की प्यास
अनमोल है जीवन
सिमरन संग कर आत्म-निरीक्षण
गुरुजी तुझे और तेरे परिवार को संभाल रहे हैं और आगे भी संभालेंगे
जो दात जब तुम्हारे लिए सही होगी , वे तुम्हें अवश्य देंगे।

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा

हर इम्तहान के लिए… (08/22/2026)

बख़्शीशें बेअंत… (08/21/2026)

अगस्त २१, २०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# ३१०६

                                बख़्शीशें बेअंत…

बख़्शीशें बेअंत
अशीशें अनंत
ना समझना उन्हें केवल इक संत
गुरुजी तो स्वयं हैं भगवंत।

लेकर आए रूप इंसानी
स्वयं सदाशिव के रूप रूहानी
आए संवारने तुम्हारी और मेरी ज़िंदगानी
लिखने हमारे कल्याण की कहानी।

ऐसे सर्वव्यापी सर्वशक्तिमान गुरुवर को प्रणाम
लेते ही जिनका नाम
मन पहुँच जाता है उनके धाम
और उनकी मेहर
सजाती है जीवन का हर पहर
हटाती है भीतर और बाहर का ज़हर
जिससे दूषित रहता है मन और जीवन
ये सब है गुरुजी का ही बड़प्पन।

हमारे जीवन में घोल कर
अपने अनुग्रह की मिठास
गुरुजी महाराज साथ निभाते हैं
रहकर भीतर और आसपास
उनकी मौजूदगी है कण कण में
उनका वास है हर जन में।

जीवन की हर सुबह और शाम के ढलते ढलते
गुरुजी महाराज के आँचल में पलते पलते
उन्हें समर्पित करते हुए हर करम
बीते जो हमारा हर जनम
तो रूहानी ग़रीबी होगी सदा के लिए दूर
पाकर गुरुजी महाराज का सनातन नूर।

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा

बख़्शीशें बेअंत… (08/21/2026)

…चाहा मेरा दिल (08/20/2026)

अगस्त २०, २०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# ३१०५

                      …चाहा मेरा दिल 

गुरुजी से मिलने को चाहा मेरा दिल
अकेलापन लग रहा था, चाहे आसपास थी महफ़िल
गुरुजी तो हैं दयावान
वे हैं करुणानिधान
मैंने जब मिलने की की दुआ
तो ऐसा हुआ
कि अन्तस के आँगन में आये वे
चित्त की छाओं पर मीठी धूप बनकर छाये वे
अपनी झाँकी दर्शाई उन्होंने मेरी भावना में
अपनी कोमलता बरसायी उन्होंने मेरी कामना में
भीतर यूँ फैला उनका नूरानी प्रकाश
कि जान गई, वे हैं मेरे बहुत पास
ये सब अंदाज़ थे इतने ख़ास
कि ख़ुशी से मतवाला हुआ यह दास।

मेरे तो रोम रोम में गुरुजी ही गुरुजी समाये इतने प्यार से
मेरा तो समा सुगंधित हुआ उनकी रूहानी ख़ुशबू और दीदार से
और चाहिए भी क्या उसे, जिसे गुरुजी जायें मिल
उसके नसीब की वाटिका का हर फूल जाता है खिल
ये तो गुरुजी की मेहरबानी है, कि उन्होंने स्वीकारा
वे हैं मेरा एकमात्र सहारा
इस दुनिया की मायावी जगमग में
मेरे लिए वे ही सब कुछ हैं इस जग में।

गुरुजी की ही बातें सुनना
गुरुजी की ही बातें करना
लगने लगा है मुझे अच्छा जब से
कुछ और सुनने कहने का जी नहीं करता तब से।

गुरुजी ने मेरा हाथ थामकर
लिया है मुझे संभाल
अपने संग जोड़ कर गुरुजी ने
कर दिया है मुझे निहाल।

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा

…चाहा मेरा दिल (08/20/2026)

युग परिवर्तन की आवाज़ (08/19/2026)

अगस्त १९, २०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# ३१०४

                                          युग परिवर्तन की आवाज़ 

ऊँची होती जा रही है युग परिवर्तन की आवाज़
और इसी में बसा है नए युग के आगमन का राज़
बढ़ाना है जो कल्याण की कामना को
तो बढ़ाना होगा भक्ति की भावना को।

सतयुग में ध्यान, यज्ञ त्रेतायुग में
द्वापर में विधि पूजन अनुष्ठान के अनुसार
कलयुग में प्रभु का नाम है आधार
जो ले चलेगा भवसागर के पार।

जान लिया जो प्रभु के नाम का महत्व
और मान लिया जो गुरुजी का प्रभुत्व
तो बस फिर उनका नाम लेते चलें
उन्ही को चेते चलें
गुरुजी का नाम, गुरुजी के मंत्र का जाप
इनसे धुलते रहेंगे पाप।

फिर युग परिवर्तन की आवाज़ का शोर
ना करेगा पहले जितना व्याकुल और परेशान
गुरुजी की याद में जितना रहेंगे
उतने करीब महसूस होंगे गुरुवर महान।

और परब्रह्म हैं गुरुजी स्वयं
जिनके समक्ष सिर झुकाते हैं हम
धन्य हैं हम कि हैं उनकी सौम्य शरण में
उनकी दया से सदा रहें उनके कमल चरण में।

युग तो आते जाते रहेंगे
समय की सरिता में सब प्राणी बहेंगे
कोई जाएगा डूब, कोई तैर पायेगा
किसी को भक्ति मिलेगी
किसी को भक्ति के संग मुक्ति
कोई जीते जी भी ना तरेगा
तो कोई मर कर भी तर जाएगा
कोई कालचक्र से ना बचा है ना बच पायेगा।

बहुत ज़रूरी है कि मन शांत और स्थिर रहे
ताकि युग परिवर्तन की आवाज़ जो कहे
हम पायें उसे सुन और समझ
और मन ना जाये उलझ
बल्कि मन का बल बढ़ता जाये इस दौरान
ताकि गुरु कृपा से जो भी हो परिणाम
हम उसे कर पायें नीवेंपन से स्वीकार
और गुरुजी की दया से होता रहे हमारा उद्धार।

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा

युग परिवर्तन की आवाज़ (08/19/2026)