अप्रैल १५, २०२६
ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏
# २९७८
जब से मन में गुरुजी पधारे
जब से मन में गुरुजी पधारे
हो गए मेरे तो वारे न्यारे
मेरा जीना मरना सब है उनके सहारे
कृतज्ञ हूँ मैं कि उन्होंने बुलाया अपने द्वारे।
गुरुजी सर्वशक्तिमान
आसन पर हुए विराजमान
झुकने लगा आसमान
करते हुए उनका गुणगान।
गुरुजी ने की कृपा अपरम्पार
मेरे मन को शिवालय बना दिया
शिवालय में बरसने लगा उनका प्यार
उज्जवल हुआ उनके नाम का दिया।
दिये की रोशनी का रूप हुआ रूहानी
शिवालय में गूँजने लगी गुरबानी
गुरुजी ने अपने चरणों में बिठाया
बड़े प्रेम से प्रसाद छकाया।
गुरुजी ने डाली मुझ पर अपनी दृष्टि
शिवालय में हुई अमृत की वृष्टि
शिवालय महकने लगा गुरुजी की खुशबू से
गुरुजी के लिए शुक्राना निकला रूह से।
मेरा रोम रोम गद गद हो गया
तन हुआ अस्तित्वहीन, मैं गुरुजी में खो गया
मन रूपी शिवालय में सुनायी दिया “ओम नमः शिवाय” का जाप प्रबल
यूँ लगा जैसे कई जन्मों से चल रहा कोई यज्ञ हुआ हो सफल।
ऐसा अनुभव होता है अक्सर
गुरुजी संग समा बिताने पर
गुरुजी की हुई असीम नदर
पाप कि शिवालय बना भीतर।
लागी रहे सिमरन की मीठी प्यास
बढ़ता रहे गुरुजी पर विश्वास
गुरुजी से है ये मुझ नाचीज़ की अरदास
कि इस शिवालय में सदा रहे उनका वास।
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जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा
जब से मन में गुरुजी पधारे (04/15/2026)