अप्रैल १७, २०२६
ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏
# २९८०
जाना और माना है रब
गुरुजी को जाना और माना है रब
गुरुजी पर छोड़ना होगा सब
तब सफ़र लगने लगेगा पहले से आसान
बेशक आते रहें जीवन में तूफ़ान।
ख़ुद में है ही नहीं वो काबिलियत
कि हो पायें तन मन से स्वस्थ
कि काट पायें अपने कर्म समस्त
कि मिटा पायें अपनी हैसियत।
गुरुजी तो स्वयं हैं खुदा
उनके लिए हम नहीं हैं उनसे जुदा
उन्हें सर्वसमर्पण करने में है हमारा कल्याण
फिर भी ये करने से क्या हमें रोक लेता है हमारा अभिमान?
या फिर गुरुजी पर हमें विश्वास नहीं है पूरा?
या फिर हमारा भक्ति भाव है अधूरा?
गुरुजी ने बुलाया है अपने दर पर
ये है उनकी मेहर
उन्हें सर्वसमर्पण ना करना होगी ग़फ़लत हमारी ओर से
क्यूँकि केवल गुरुजी देख सकते हैं हमारी हर परेशानी को गौर से
और कोई भी नहीं देख या जान सकता हमारी मजबूरी
इसलिए गुरुजी को सर्वसनर्पण कर मिटानी होगी उनसे हर दूरी।
गुरुजी से किसी भी प्रकार की दूरी होगी जब तक
गुरुजी की प्राप्ति नहीं हो सकती तब तक
इसमें नहीं है तनिक भी शक
इसलिए इसके लिए जाना होगा किसी भी हद तक
बल्कि फिर हद के भी पार
ताकि गुरुजी संग हो जायें एकाकार।
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जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा
जाना और माना है रब (04/17/2026)