अप्रैल २०, २०२६
ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏
# २९८३
जीवन की तस्वीर
रूह को मिला नक़ाब
जो बन गया शरीर
कर्मों की खुली किताब
जो बन गई तक़दीर
फिर कर्मों का हुआ हिसाब
तो बनी जीवन की तस्वीर
ये रूहानी सफ़र है जनाब
ज़रूरी है संभाल कर रखना अपना ज़मीर।
रूह से रूह का नाता है हर भक्त का गुरुजी के संग
जितना गहरा ये नाता, उतना गहरा होगा भक्ति का रंग
दुनिया के मेले में रंग हैं बेशुमार
पर भक्ति के रंग के समक्ष वे सब हैं बेकार।
दुनियावी रंगों में चल तो जाएगी ज़िंदगानी
पर ज़रूरी है ख़ुद पर चढ़ाना रंग रूहानी
और गुरुजी की भक्ति में मिलता है इसका शुभ अवसर
जैसे जैसे उनकी शरण में गुज़रता है ये सफ़र।
इक दिन इस जीवन की तस्वीर की उम्र हो जाएगी पूरी
कहीं कर्मों की अदाकारी ना रह जाए अधूरी
वरना रूह को ओढ़ने पड़ेंगे ना जाने और कितने नक़ाब
पूरा करने कर्मों का हिसाब
जिसके बीच और हिसाब जुड़ते जायेंगे
ना जाने फिर परमात्मा से कब मिल पायेंगे?
तोड़ कर क़ैद करने वाली हर ज़ंजीर
जान और मान कर ख़ुद को इक फ़क़ीर
सीखना होगा रूहानियत का ढंग
अपना कर भक्ति का रंग।
बहुत दे लिया ख़ुद को धोखा
अब गुरुजी ने दिया है मौक़ा
गुरुजी महाराज हैं हमारे अंग संग
जीवन की तस्वीर में हम भरें भक्ति के मंगलमयी रंग।
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जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा
जीवन की तस्वीर (04/20/2026)