अप्रैल २२, २०२६
ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏
# २९८५
घर परिवार
घर परिवार
ये संसार
प्रतिष्ठा, प्रभुत्व
जीवन के कर्तव्य
रोटी, कपड़ा, मकान
इनका मोह कर देता है परेशान
जब लेते हैं सांसें आख़िरी
जब यहाँ से जाने की आती है बारी।
ना चाहते हुए भी हो जाती है इनमें आसक्ति
ख़ुद के लिए नामुमकिन कर देते हैं मुक्ति
गुरुजी महाराज ही दे सकते हैं वह शक्ति
जिस से सीख जायें अनासक्ति की युक्ति।
वरना यहाँ आना जाना रहेगा जारी
ना जाने कितनी बारी
कर के किस किस देह पर सवारी
देह का भार उठायेगी रूह बेचारी।
गुरुजी महाराज करें रहम
तो ही कटेंगे सभी करम
तो ही निभा पायेंगे इस तरह से इंसानी धरम
कि संपन्न हो जाये जन्म मरण।
रूह को अज्ञात भविष्य का भी रहता है भय
इसमें नहीं है कोई संशय
इन सबका है एकमात्र उपाय
कि गुरुजी को सर्वसमर्पण कर दिया जाये।
कहना आसान, करना कठिन
ना हो पाये ये गुरुजी की दया बिन
और जो वे हो जायें मेहरबान
और मिल जाये उनकी दया का दान
तो दूर हो जाएगा सारा अज्ञान
और रूह को हमारे जीते जी मिल जाएगा आराम।
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जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा
घर परिवार (04/22/2026)