स्वयं को तैयार (04/24/2026)

अप्रैल २४, २०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏 # २९८७

                          स्वयं को तैयार 

गुरुजी ने थामी है तुम्हारे जीवन की डोर
वे ले चल रहे हैं तुम्हें आंतरिक परिवर्तन की ओर
ये ज़रूरी है धर्म की स्थापना के लिए
वरना उज्जवल ना हो पायेंगे चेतना के दीये।

मन के महिषासुर का होना होगा नाश
वरना निश्चित है विनाश
गुरुजी आए हैं तुम्हें बचाने
तुम्हें अपने सत्संग में बिठाने
तुम्हारी आंतरिक चेतना बढ़ाने
तुम्हें उस सामूहिक चेतना का हिस्सा बनाने
जिसके द्वारा वे कर रहे हैं जग का कल्याण
उसे भी तुम उनकी लीला लो मान।

जग में हो सकारात्मकता का सकाश
जग में हो पवित्रीकरण और प्रीत का प्रकाश
बहुत ज़रूरत है संवेदना और सम्भाव की
ताकि समाप्ति हो आसुरी प्रभाव की।

है ये युग परिवर्तन की बेला
हर कोई महसूस करने लग रहा है अकेला
किंतु गुरुजी दिलाते हैं तुम्हें अपने सानिध्य का एहसास
इसे महसूस करने के लिए उनसे जोड़ो अपने श्वास
अद्भुत हैं गुरुजी के कल्याण करने के अंदाज़
तुम अपनी ओर से करो उनकी याद में रहने का प्रयास।

फिर कभी अकेला ना महसूस करोगे
ना ही आसुरी प्रभाव से डरोगे
गुरुजी सूर्य हैं तो तुम हो उनकी किरण
गुरुजी से ही है तुम्हारा अस्तित्व और जन्म मरण
और जैसे किरण सदा तैयार रहती है सूर्य में समाने के लिए
वैसे ही तुम भी करो स्वयं को तैयार गुरुजी में खो जाने के लिए।

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जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा

स्वयं को तैयार (04/24/2026)

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