होना भी अगर चाहो तुम… (04/25/2026)

अप्रैल २५, २०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# २९८८

    होना भी अगर चाहो तुम…

होना भी अगर चाहो तुम
तो हो नहीं सकते किसी के अपने
और कोई भी तुम्हारा अपना है
ऐसे ख़याल हैं महज़ कुछ सपने।

हकीकत है ये, मान लो तो है अच्छा
इक रिश्ते के अलावा कोई रिश्ता नहीं है सच्चा सुच्चा
वो रिश्ता है गुरुजी का तुम्हारे साथ
इस रिश्ते में है वह बात…
जो रूह को छू जाती है
जो निर्मल सुकून लाती है
रोम रोम में तुम्हारे…
और बेशक खड़ी हों लाखों दीवारें
गुरुजी देते हैं उन्हें तोड़
ताकि तुम सब कुछ छोड़
उनके ही हो जाते हो
उनसे यूँ जुड़ जाते हो
जैसे तरुवर से डाली और फूल…
और बनकर उनके चरणों की धूल
कर देते जो उन्हें स्वयं को अर्पण
और उनकी ही याद में रहते हो हर क्षण।

ये गुरुजी की महर से ही होता है
कि भक्त इतना उनमें खोता है
कि संसार में रहते हुए भी
फ़र्ज़ और कर्मों का भार सहते हुए भी
उसका ध्यान होता है गुरुजी की ओर
और गुरु चरण होते हैं उसकी आरम्भिक और अंतिम छोर।

जिसका गुरुजी की ओर मुख है
वह जाने की गुरुजी के चरणों में हर सुख है
गुरु चरणों में है धीरज और संतोष
गुरुजी ही मिटा सकते हैं हर दोष
और मिटा कर भक्त की रूह पर लगा हर दाग
गुरुजी अपनी कृपा से बनाते हैं रूह को पाक…
और यूँ कर के रूह को तैयार
वे ले जाते हैं इस भवसागर के पार
रूह की मंजिल है जहाँ
जहाँ है सचखंड का जहाँ।

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जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा

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