मई ७, २०२६
ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏
# ३०००
नायाब नदर
जब ‘मैं’ मिटे तो गुरु मिले
गुरु मिले तो नसीब खिले
व्यर्थ हैं बाक़ी सभी सिलसिले
इसलिए भूल कर सब शिकवे गिले
ख़ुद को गुरुजी में खोने का करो प्रयास
बेशक करना पड़ेगा अभ्यास
किंतु बनकर उनका दास
ये प्रयास आयेगा रास।
जितना शीघ्र उनके समक्ष तुम्हारा सयानापन मानेगा हार
उतनी जल्दी मिटने लगेगा तुम्हारा अहंकार
गुरुजी की कृपा तो बरस रही है अपरम्पार
परंतु गुरुजी यूँ ही नहीं सबको देते स्वयं में समाने का अधिकार।
तराशते हैं वे, परखते हैं
लेते हैं इम्तहान
मत पत के राखा भी वे ही हैं
वे ही चूर करते हैं अभिमान।
हर इम्तहान है इक कदम
जो लायेगा तुम्हें गुरुजी के क़रीब
उनके क़रीब होते होते उनमें खो कर ख़ुद को
जगा लो तुम अपना नसीब।
जिसने ख़ुद को खो कर
गुरुजी को पा लिया
उस जैसा खुशनसीब कोई नहीं
उसने जीते जी वो अमृत पिया
जो राज़ है हर पल की तृप्ति का
और सूचक है ये मुक्ति का
बस, मन में और मुख पर हो ये अर्ज़ी
कि चले केवल गुरुजी की मर्ज़ी।
बस, फिर क्यों कोई भी विलंब
क्यों ना करें शुभता का शुभारंभ
गुरुजी की शरण में
उनके कमल चरण में
गवाह बनेगी स्वयं गुरुजी की नूरानी नज़र
दया फ़रमाएगी गुरुजी की नायाब नदर।
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जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा
नायाब नदर (05/07/2026)