मई १०, २०२६
ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏
# ३००३
बनकर सबकी माँ
ऐसी कृपा है गुरुजी मेहरबाँ की
कि पिता के संग उनमें छवि बसी है माँ की
उनकी ममता का रूहानी स्पर्श
देता है अंतस को वो हर्ष
जिसकी उपमा नहीं की जा सकती
जिसके लिए शुकराना करते मैं नहीं थकती।
गुरुजी महाराज के आँचल में
बसती है माँ की ममता
वो ममता जिसमें है
हर घाव को भरने की क्षमता
उनका आँचल समेट लेता है
भक्त का हर इक आँसू
और इतना स्नेह बरसाते हैं वे
कि गद गद हो जाती है रूह
हर दुख हवा में कहीं ग़ायब हो जाता है
भीतर और बाहर गुरुजी का प्यार रंग लाता है।
गुरुजी महाराज के चरणों में
सुख का सुंदर संसार है
जो दुनियावी माता पिता के दुलार के भी पार है।
सच कहूँ तो दुनियावी माँ से बिछड़ कर
हुआ था मुझे गम जितना
उस से कहीं ज़्यादा सुकून मिला गुरुजी से
गुरुजी ने प्यार दिया है इतना।
परम पूज्य गुरुजी ने मुझे अपनाया
मोह और प्यार में फ़र्क़ समझाया
मेरा हाथ थामकर मेरा अकेलापन मिटाया
मेरी गलतियों के बावजूद मुझे गले से लगाया
मेरी सुख सुविधाओं का सदा रखते हैं वे ख़याल
दुविधा दूर करते हैं जब मन में होते हैं अनेक सवाल
कह देती हूँ उन्ही से अपने दिल की हर बात
इंतज़ार नहीं करना पड़ता क्यूँकि वे सदा होते हैं साथ
उनकी याद में है हर दिन शुरू करने की खुमारी
उनकी याद में रहकर होती है रात में सोने की तैयारी
खाने के हर दाने में है उनके प्रेम का रस
माँ की छवि लेकर वे मेरे ख़यालों में गए हैं बस
मैं तो हूँ एक छोटा सा टिमटिमाता तारा और उनका आँचल है असीम आसमाँ
गुरुजी तो अनगिनत तारों को संजोकर संभालते हैं बनकर सबकी प्यारी माँ।
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जय गुरुजी 🙏🙏
धीरज
बनकर सबकी माँ (05/10/2026)