मई ११, २०२६
ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏
# ३००४
दया के महासिंधु
दया के महासिंधु हैं मेरे गुरुजी महाराज
सारी की सारी सृष्टि में सबसे सुंदर हैं मेरे सरताज
वे हैं इशरत्व का विस्तार और सार
उनकी कृपा पर निर्भर है मेरा घर परिवार।
जब सुनती हूँ अपनी अंतरात्मा की आवाज़
होता है भीतर गुरुजी के वास का एहसास
ये एहसास होता है अति अनमोल और खास
और सुकून से लेती हूँ फिर मैं श्वास।
आँखें खुली होती हैं जब
उनकी अदृश्य मौजूदगी महसूस कर पाती हूँ तब
आँखें मूँद लेती हूँ जब
तो नज़र आने लगता है उनका स्वरूप तब।
उनकी रूहानी ख़ुशबू
जिससे महक उठती है मेरी रूह
देते हुए रूहानी जुड़ाव का प्रमाण
और गद गद हो जाता है गिरेबान।
सुनते हुए उनकी बतायी ग़ुरबानी
उनके ख़याल में खो जाती हूँ मैं निमानी
कभी आँसू बहने, कभी मुस्कुराहट आनी
बेशक हो मन में कोई परेशानी।
क्यूँकि याद दिलाते हैं महाराज
कि जो हो रहा है आज
वो है पिछले कर्मों का परिणाम
और उनकी शरण में निश्चित है कल्याण।
उनका दिया प्रोत्साहन बढ़ा रहा है मुझे आगे
उनकी कृपा से ही टूटेंगे मोह के धागे
गुरुजी महाराज ने थामा है जब से मेरा हाथ
उनकी मेहर से जब से नाता जुड़ा है उनके साथ
ज़िंदगी में हुए हैं ऐसे परिवर्तन
कि पहले जैसे नहीं रहा जीवन।
उन दयासिंधु के चरणों के तले की धूल बनकर जीयूँ
उनके चरणों का निर्मल अमृत पीयूँ
अब तो सोते जागते कहे ये मन
कि कभी ना छूटे गुरुजी का दामन।
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जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा
दया के महासिंधु (05/11/2026)