मई १४,२०२६
ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏
# ३००७
नदिया दीवानी
शांत बहती नदिया दीवानी
फिर पत्थर से टकरायी वो निमानी
काँप सा गया उसका पानी
हो गई उसे परेशानी।
फिर उसे याद आई अपनी नादानी
कि वह गुरुजी की याद से हो गई थी अनजानी
अपनी नादानी पर उसे हुई हैरानी
क्यूँकि वह हुई थी गुरुजी के नाम से बेगानी।
उसने मन ही मन माँगी गुरुजी से क्षमा
अर्जी की कि वे संभालें उसका समा
जानती थी कि स्वाभाविक है पत्थरों का रास्ते में आना
उसने गुरुजी से अरदास की कि मीठा लगे उसे उनका भाणा।
कहते कहते, इस से पहले की उसके आँसू बहते
गुरुजी महाराज ने सुन ली नादिया की अरदास
और बख्शी उसे ऐसी हिम्मत और ऐसा मनोबल
कि उसकी परेशानी गई टल।
नादिया की राहों में पत्थर रहे आते जाते
पर नादिया में थी इक अद्भुत सी शक्ति
क्यूँकि गहरी हो चुकी थी उसकी गुरुजी के प्रति भक्ति
और वो बन गई थी हर पत्थर को बिन परेशानी पार करने की युक्ति।
बीते अनेकों साल
परेशान ना हुआ नदिया का हाल
वो बहती रही व्यस्त होकर
गुरुजी की याद में मस्त होकर
फिर वक़्त आया सागर में समाने का
तो मोल समझ आया गुरु नाम के ख़ज़ाने का
क्यूँकि गुरुजी के नाम के सागर में वो समायी
गुरुजी में समायी जब यहाँ से हुई उसकी विदायी।
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जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा
नदिया दीवानी (05/14/2026)