मई १५,२०२६
ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏
# ३००८
…अब तो जाग
ए मानव, तू हर पहर
घोलता है कर्मों में आसक्ति का ज़हर
अपनी सोच में लाता है अहंकार
कैसे होगा तेरा उद्धार?
पंचभूत से बना तेरा शरीर
पंचभूत में ही समा जाएगा
अहंकार और आसक्ति लेकर
जाएगा तो कहाँ जाएगा?
गुरुजी महाराज का दिखाया रास्ता
करेगा तेरी सहायता
मिट जायेंगे अहंकार और आसक्ति
जैसे जैसे गहरी होगी भक्ति।
इस रास्ते पर है ऐसा अमृत
जो अहंकार और आसक्ति के विष को कर देगा शक्तिहीन
गुरुजी चाहते हैं भक्तों का हित
इसलिए तू ये अमृत ग्रहण कर बन कर उनका दास दीन।
गुरुजी हैं कृपालु करुणामय दीनदयाल
उनके भरोसे आज़ाद हो, छोड़कर अहंकार और आसक्ति का जाल
देखना तू अपने सुख और संतोष को बढ़ते हुए
देखना स्वयं को रूहानी सीढ़ी चढ़ते हुए।
भक्ति की गहराई
रूहानियत की ऊँचाई
ये उसके नसीब में आई
जिसने त्यागी अहंकार और आसक्ति की परछायी
वरना ये परछायी ही अंधेरे का कारण जाती है बन
और इसकी वजह से कमज़ोर होता जाता है मन
कमज़ोर मन बाधा है भक्ति के रास्ते पर
रोक लेता है ये मुक्ति की ओर का सफ़र।
गुरुजी से माँगता है तू अपना कल्याण
तू भी दे अपनी ओर से पूरा योगदान
अहंकार और आसक्ति को त्याग
बहुत सो चुका, अब तो जाग।
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जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा
…अब तो जाग (05/15/2026)