मई २५,२०२६
ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏
# ३०१८
उनके मनन में मलंग
मुश्किलों से परेशानी बढ़ गई इतनी
कि मुश्किल हो गया मुश्किलें सहना
गुरुजी का शुक्र कि उन्होंने प्रेरणा दी
उनकी आवाज़ आई, उन्होंने कहा, चलते रहना।
कहा उन्होंने कि वे हैं साथ
मैने देखा जो अपना हाथ
तो हुआ ऐसा एहसास
कि गुरुजी हैं बिल्कुल पास
मेरा हाथ थामे, दे रहे हैं मुझे सहारा
शुक्र, शुक्र, क्यूँकि उनके बिन मेरा नहीं है गुज़ारा।
मैने चूम लिया गुरुजी का हाथ
जो थामे हुए था मेरे हाथ को
गुस्ताख़ी की माफ़ी, गुरुदेव
मन ही मन मैने कहा अपने नाथ को।
रूहानी तार जो जुड़ी
तो सोच गुरुजी की ओर मुड़ी
करती रही गुरुजी से बात
बीत गई वह लंबी रात।
गुरुजी ने हुक्म दिया चाय बनाने का
तो मालूम चला कि वक़्त आया रात के जाने का
गुरुजी ने चाय स्वीकार कर दिया अपना आशीर्वाद
शुक्र, शुक्र, कि मुझे मिला वह चाय प्रसाद।
मुश्किलें गई नहीं
लेकिन महाराज करेंगे सब सही
सही समय के आने पर
मिला ये रूहानी वर
रूहानी तार जोड़ कर
और जारी रहा सफ़र।
गुरुजी के संग इस नाते में है कितना सुकून
गुरुजी को पाने का ही हो जाये जो जुनून
तो मुश्किलों से नहीं होगी परेशानी
ऐसी होगी गुरुजी महाराज की मेहरबानी।
बस, भोग भोले भाव का
भक्ति के चारुल चाव का
जुड़ी रहूँ गुरुजी के संग
रहूँ उनके मनन में मलंग।
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जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा
उनके मनन में मलंग (05/25/2026)