मई २७,२०२६
ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏
# ३०२०
आया वह शुभ दिन
आया वह शुभ दिन
ज़िंदगी ना सँवरती जिनके बिन
उन गुरुजी ने बुलाया अपने दरबार में
मैं बेचैन थी इस मौके की इंतज़ार में।
दरबार के बाहर ही महसूस हुआ ऐसा स्पंदन
कि पहले से भी ज़्यादा आकर्षित हुआ मेरा मन
पहुँची जब मैं भीतर
मिला वहाँ खड़े होने का अवसर।
तभी आई ऐसी अनोखी ख़ुशबू
कि मिलन के रस में डूबने लगी मेरी रूह
आते हुए देखा गुरुजी महाराज को
जान गई ख़ुशबू के राज़ को।
जब गुरुजी आए चोला पहन कर
तो गुलिस्ताँ से भी ज़्यादा खिल गया वह दर
गुरुजी विराजमान हुए अपने आसान पर
मन में आया कि उन्हें देख लूँ एक नज़र।
नज़र मिलानी चाही तो मिला ना पायी
इतना नूरानी तेज था उनके चेहरे पर
और मुश्किल था नज़र बचाना भी
क्यूँकि उनकी नज़र में थे सभी।
सोचा कि कहूँ उनसे मेरे मन में है क्या
इतने में गुरुजी ने वही मुझे कह दिया
इक पल के लिए मैं हुई हैरान
फिर याद आया की गुरुजी तो हैं भगवान।
उन्होंने चरण स्पर्श की आज्ञा दी तो मन ही मन किया उनका धन्यवाद
बैठ गई और चाय प्रसाद और लंगर प्रसाद से मिला उनका आशीर्वाद
सुनी मैने सौम्य ध्वनि और शब्दों से परिपूर्ण गुरबानी
धरती पर तब तक ना देखा था स्थान ऐसा रूहानी।
पता ही नहीं चला कब बीत गया समय
भीतर और बाहर सब हो चुका था शिवमय
जब गुरुजी से आज्ञा मिली और बाहर मैं आई
तो ज़िन्दगी एक नए अंदाज़ से मुस्कुरायी।
गुरुजी की कृपा से सारी संगत की ज़िंदगी मुस्कुराए
उनकी मेहर से अगर कष्ट आए तो हिम्मत और बढ़ जाये
उनके आँचल में पलते पलते सारी संगत जाये तर ख़ुशक़िस्मत है वह जन जिसका गुरुजी के चरणों में गुज़र जाये सफ़र।
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जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा
आया वह शुभ दिन (05/27/2026)