मई २८,२०२६
ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏
# ३०२१
स्वयं सदाशिव का रूप हैं
स्वयं सदाशिव का रूप हैं
गुरुजी तो रब का रूप हैं
कइयों को दिखें वे चाँद में
किसी विरले को दिखें सूरज में भी
शरीर से बेशक गुरुजी यहाँ नहीं
किंतु हैं वे बिल्कुल यहीं।
तन मन में गुरुजी
कण कण में गुरुजी
रूहानी एहसास हैं गुरुजी
बिल्कुल पास हैं गुरुजी।
तुम्हारे भीतर भी हैं गुरुजी महाराज
मेरे भीतर भी गुरुजी करें राज
गुरुजी थे और हैं सृष्टि के सरताज
जो संवारते हैं भक्तों के काज।
अपनी संगत के कल्याण के लिए ही
गुरुजी ने धारण किया शरीर
और शरीर त्याग देने के पश्चात भी
निखारते हैं वे भक्तों की तक़दीर।
गुरुजी के कमल चरण में शत शत नमन
उनका मनन कर के तर जायें मैं और मेरा मन
गुरुजी महाराज की रूहानी छत्र-छाया में गुज़र जाये जीवन
शुक्राना गुरुजी का कि मिली मुझे उनकी शरण।
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जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा
स्वयं सदाशिव का रूप हैं (05/28/2026)