जून ३,२०२६
ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏
# ३०२७
ज़िन्दगी जिये हुए…
ज़िंदगी जिये हुए ज़माना था हो गया
मुस्कुराहटों का ख़ज़ाना था खो गया
पर जब से मैं गुरुजी का हो गया
तो मिल गया वो खोया ख़ज़ाना
लौट आया वो गुज़रा ज़माना
मैं ज़िंदगी जीने लगा, मुझे आ गया फिर से मुस्कुराना।
ऐसा नहीं कि सभी दुविधाएं और मुश्किलें विदा हुईं
लेकिन उनसे जुड़ी चिंतायें काफ़ी हद तक जुदा हुईं
क्यूँकि गुरुजी के चिंतन ने ले लिया चिंता का स्थान
गुरुजी महाराज हैं इतने मेहरबान।
देकर प्रोत्साहन और हिम्मत
बख़्शी उन्होंने ही इबादत
दी अकल्पनीय ताक़त
प्रदान की सुमत।
गुरुजी ने अपने सिमरन में मस्त किया
अपनी सेवा में व्यस्त किया
बख्शे इतने भव्य अनुभव
समझाया सत्संग का महत्व।
शुक्राना में जीना सिखाया
दुविधा हुई तो रास्ता दिखाया
याद दिलाते हैं हर कर्तव्य
हूँ मैं उनके प्रति अत्यंत कृतज्ञ।
गुरुजी ने इंसान के रूप में दिया जन्म
एहसास हुआ कि कितना अनमोल है ये जीवन
बंदा बनकर जीनी है ज़िंदगी
अच्छायी और सच्चाई बिन अधूरी है बंदगी
ये सब गुरुजी की दी चेतना से रहने लगा याद
और उनकी दी हर प्रेरणा बनी आशीर्वाद
क्यूँकि उनकी प्रेरणा के बिन मैं ना चल पाऊँ एक भी कदम
अब तो उनके सानिध्य से ही है मेरा जीवन।
मिली है गुरुजी की कृपा से उनकी शरण
क्यों ना पावन पूर्णता से जी लूँ ये जीवन
गुरुजी की दी हुई दात है हर श्वास मेरा
उन्ही पर टिका है विश्वास मेरा
उन्ही के चिंतन और ध्यान से पूरी है मेरी बंदगी
गुरुजी की दया से जी लूँ अब मैं ये ज़िंदगी।
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जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा