रहे ही ना कोई और आरज़ू (06/06/2026)

जून ६,२०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# ३०३०

     रहे ही ना कोई और आरज़ू

बेशक कोशिश थी रहने की बंदगी में
फिर भी कमी सी महसूस होती थी ज़िंदगी में
फिर गुरुजी की कृपा से उनसे हुआ जुड़ाव
उनकी दया से उनकी ओर हुआ खिंचाव
पहले भी भीड़ में लगता था सूना सा अक्सर
लेकिन किसी तरह वक़्त जाता था गुज़र
और फिर जब से गुरुजी से लागी लगन
भीड़ में बिलकुल भी लगता नहीं है मन
रास आती है वही महफ़िल
जहाँ गुरुजी को सलाम हो
आकर्षित करती है वही संगत
जहाँ गुरुजी को प्रणाम हो
एकांत ही सही है वरना
क्यूँकि गुरुजी को याद करना
यही मक़सद बन चुका है जीवन का
गुरुजी का शुक्र कि ऐसा हुआ है हाल मन का।

नहीं महसूस होता है एकांत में अकेलापन
जब गुरुजी से जुड़ा होता है मन
मन गुरुजी के ख़यालों में खो जाता है
ये गुरुजी की कृपा से ही हो पाता है।

अच्छा लगता है सुनना और करना बातें गुरुजी महाराज की
इतनी ख़ुशी होती है जो आ जाती है ख़ुशबू मेरे सरताज की
उनके ज़िक्र, उनके सत्संग, उनके गुणगान से हर भोजन बन जाता है प्रसाद
गुरुजी की याद, उनका रूहानी सानिध्य हैं अति सुंदर आशीर्वाद।

ज़िंदगी के सुख दुख से किसी तरह से भी प्रभावित होना छोड़ सकूँ
मेरे दाता करें ऐसी मेहर
मेरी हर वो आदत जो उन्हें नापसंद हो, मैं उसे तोड़ सकूँ
करूँ उनसे विनती हर पहर
गुरुजी के नाम से ही शुरू हर दिन
रात भी नहीं उनकी याद के बिन
उन्ही की याद में दिनचर्या सारी
उनकी याद में आसानी से कटे बीमारी
दिन रात मिलता रहे गुरुजी का साथ
हर पल अंग संग रहें मेरे नाथ
यहाँ और वहाँ उनमें संलग्न रहे मेरी रूह
ऐसी हो जाऊँ कि रहे ही ना कोई और आरज़ू।

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जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा

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