जून १०, २०२६
ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏
# ३०३४
बगिया और तितली
बहुत सुंदर सा प्रभात था
जिसमें अस्तित्व खोया था रात का
पंछी रहे थे चहक
फूल रहे थे महक
इक मनोहर तितली आई
आकर इक फूल पर मंडरायी
इधर उधर वो डोली
फिर बगिया से वो बोली,
“अरे ओ बगिया प्यारी
तू किसकी है राज दुलारी?”
बगिया बोली, “ अपने प्यारे गुरुजी महाराज की
अपने सुंदर सरताज की।”
तितली को हुई हैरानी
कि बगिया है किसी गुरुजी की दीवानी
उसने बगिया से कहा गुरुजी रहते हैं कहाँ
बगिया ने बताया कि गुरुजी का है ये सारा जहाँ
वे रहते हैं हर भक्त के भीतर भी
और हर जगह पर हैं वे ही।
बगिया ने कहा गुरुजी हैं वहीं
जहाँ है आसमान और ज़मीन
और उसके आर पार
उनसे ही चलता है संसार।
उसी समय बगिया में इक अद्भुत सी ख़ुशबू आई
आसपास कोई बूँद नहीं थी पर बगिया में बारिश सी आई
बगिया ने शुक्राना का गीत गाया और वो मुस्कुरायी
तितली को उसकी प्रतिक्रिया समझ ना आई
उसके पूछने पर बगिया ने उसे बताया कि ये ख़ुशबू गुरुजी की है
और इस वर्षा में भी मौजूदगी उनकी है
क्यूँकि ये अमृत वर्षा है उनकी मेहरबानी से
और जैसे ही बगिया ने ये कहा
तितली से रहा ना गया
उसने शुक्राना में अपने पंख जोड़े प्यार से
और मन ही मन कहा गुरुजी को पुकार के
कि वे उसे भी अपने कमल चरण में दें स्थान
ताकि हो जाये उसका भी कल्याण।
तभी हवा का एक तेज झोंका आया
और उसके स्पंदन ने तितली को गले से लगाया
तितली को महसूस हुआ दिव्य शक्ति का आलिंगन
वो प्रसन्न हुई मन ही मन
गुरुजी की मौजूदगी और स्वीकृति को गई वह जान
तभी ओम के नाद से गूंजने लगे उसके कान
वह गुरुजी में पूरी तरह से खो गई
बगिया ने सोचा कि तितली सो गई।
कुछ देर के बाद
तितली ने की बगिया से बात
उसने बगिया को अपना अनुभव सुनाया
बगिया और तितली का मन हर्षाया
गुरुजी की बातों में बीतने लगे उनके दिन और रात
तर गए दोनों, पाकर गुरुजी का आशीर्वाद।
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जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा
बगिया और तितली (06/10/2026)