जून १३, २०२६
ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏
# ३०३७
फूलों और कलियों का उद्धार
मस्ताना सा इक फ़क़ीर था
भीतर से बहुत अमीर था
छोड़ कर हर दिखावे वाली रीत
गाते हुए गुरुजी के गीत
फ़क़ीर गुज़र रहा था हर गली से
बात करते हुए हर फूल और कली से
सुनाते हुए उन्हें गुरुजी के सत्संग
उनके जीवन में भरते हुए रूहानी रंग।
हर फूल और कली की नींद उड़ गई
हर फूल हर कली गुरुजी से जुड़ गई
उनके हृदय में जल गए भक्ति के दीये
तरसने लगे वे गुरुजी के चरण छूने के लिए।
गुरुजी तो सब के स्वामी हैं
वे तो अंतर्यामी हैं
जान गए फूलों और कलियों के मन की बात
और जब उनका एक दास आया उनके पास उस रात
गुरुजी ने दिया उसे आदेश
की वह करे उस गली में प्रवेश
जहाँ फूलों और कलियों का है बसेरा
और जब हो जाये सवेरा
तो वो गुरुजी के लिए कुछ फूल और कलियाँ लाए
दास ने आज्ञा मानी बिना हिचकिचाये।
फूल और कलियाँ थे गुरुजी के लिए उदास
तभी दास पहुँचा उनके पास
फूलों और कलियों की ख़ुशी का ना रहा ठिकाना
जब दास ने उन्हें बताया उन्हें कहाँ है जाना।
आया वह शुभ पल जब दास ने छुए गुरुजी के कमल चरण
और फूलों और कलियों को किया गुरु चरणों में अर्पण
गुरुजी ने उन्हें दिया तार
कर के उनका उद्धार
बना कर उन्हें अपने चरणों की धूल
हर्षित हुई हर कली, हर्षित हुआ हर फूल।
गुरुजी के कमल चरण में है सभी का कल्याण
गुरुजी हैं समस्त सृष्टि के भगवान
सभी को देने में समर्थ हैं वे अपनी दया का दान
गुरुजी की महिमा है अत्यंत महान।
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जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा
फूलों और कलियों का उद्धार (06/13/2026)