जून २१, २०२६
ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏
# ३०४५
निर्मल नाथ मेरे
निर्मल नाथ मेरे
सदा साथ हैं मेरे
मैं जहाँ भी जाती हूँ
उनकी मौजूदगी पाती हूँ…
कभी ख़ुशबू उनकी
कभी श्रुति जाप की धुन की
कभी अमृत उनके चरण में
उनका सिमरन मेरे मन में…
उनका होना विराजमान हर सत्संग में
उनकी लीला प्रकृति के हर रंग में
स्वरूप उनके सभी इतने दिव्य और खूबसूरत
दिल में बसी हुई उनकी मोहिनी मूरत
उनका मेरे जीवन में मार्गदर्शन
उनकी याद मेरे हृदय में हर क्षण
भोजन के हर निवाले में उनकी दी औषधि
चाय प्रसाद की हर बूंद में बख़्शीश उनकी दी…
गुरुजी की मौजूदगी से ही हर प्रेरणा और निर्णय
उन्ही के होने से मैं हूँ निर्भय
मुझ में चेतना के रूप में भी गुरुजी ही बसते हैं
मुझे हर ख़ुशी देते हैं गुरुजी और स्वयं भी हँसते हैं
उनका गंभीर चेहरा देखती हूँ जब मैं दुविधा में होती हूँ
जब स्वप्न दर्शन देते हैं तो भी मैं उनमें खोती हूँ…
वे मौजूद होते हैं वहाँ
अपनी सेवा बख़्शते हैं जहाँ
उनके होने से ही तो है हर समा
उनके होने से ही तो है मेरा आशियाँ…
हर तरफ़ गुरुजी ही गुरुजी आते हैं नज़र
धरती पर महसूस कराते हैं वे सचखंड का दर
अपने मंदिर और दरबार में
निहाल किया है उन्होंने अपने प्यार में
उनके अंग-संग होने का खास है एहसास
जो उनकी कृपा से निखारता है मेरा उनपर विश्वास…
जो चलाते हैं मुझे मेरा हाथ थाम कर
वारी जाऊँ मैं उन गुरुजी, उन नाथ पर
उनकी रहमत से हूँ सलामत मैं और मेरा सफ़र
जिसके नाथ हों गुरुजी, उसे काहे का डर?
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जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा
निर्मल नाथ मेरे (06/21/2026)