जून २३, २०२६
ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏
# ३०४७
मेरे हर श्वास का शुक्राना
मेरे हर श्वास का शुक्राना
हर श्वास में बसे विश्वास का शुक्राना
गुरुजी, मुझे जितनी भी बार पड़े यहाँ से आना जाना
मुझे आपके चरणों में मिले ठिकाना।
आपसे हुआ है बेइंतहा प्यार
लफ़्ज़ों में बयान ना कर पाऊँ
आपकी शरण में हर जन्म लूँ गुज़ार
आपकी शरण में जीयूँ और मर जाऊँ।
ये प्यार बढ़ता रहे आपकी मेहर से
जागते ही कहती हूँ मैं ये हर सहर से
रात में आपके ख़यालों में खो जाती हूँ
चाँद और तारे ही जानें मैं कब सो जाती हूँ।
और जब कभी आप देते हैं स्वप्न दर्शन
तब होती हूँ यूँ आप में मगन
कि नींद खुले तो जी करता है कि फिर सो जाऊँ
और आपके स्वप्न दर्शन में फिर से खो जाऊँ।
कभी अपने पर हँसी आती है
तो कभी होती है ख़ुद पर हैरानी
कि आपकी लीला में क्या है ऐसा
कि आपकी दीवानी हुई ये निमानी।
फिर मुझे आता है याद
कि मेरी नहीं औक़ात
आपकी लीला को समझ पाने की
आपकी माया में सुलझ जाने की।
लीलाधारी मायापति सदाशिव हैं आप
और मैं इक बाँवरी सी दासी
सदा आपके प्यार की प्यासी
जिसे आपने इतनी बख़्शीशों हैं नवाज़ी।
मुझे मेरे रोम रोम में आपकी दिव्यता का होता रहे एहसास
कृपा कर कराइये मुझे इस ओर प्रयास
रम जाऊँ यूँ मैं आप में, मेरे परम पूज्य गुरुजी महाराज
कि सदा के लिए सुरति आपसे जुड़ जाये, मेरे सरताज।
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जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा
मेरे हर श्वास का शुक्राना (06/23/2026)