इच्छा थी… (06/25/2026)

जून २५, २०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# ३०४९

               इच्छा थी…

इच्छा थी मिलने की रब को
जिन्होंने संभाला है सब को
गुरुजी ने बुलाया अपने दर पर
तो सुलझ गया सफ़र
जाना कि गुरुजी ही हैं रब
उनमें समायें हैं सब।

हर गुज़रते दिन के साथ
बढ़ता चला गुरुजी पर विश्वास
अब तो तीव्र होती जाती है
गुरुजी को पाने की आस।

मिटनी होगी हर दूरी
उनसे अपनी रूह की
अगर उनको पाना है
बाक़ी हर संबंध तो बेगाना है।

इसलिए उन्ही की प्राप्ति है सार्थक
जिसके लिए श्रद्धा चाहिए अथक
गुरुजी बख़्शते रहें वो श्रद्धा, वो विश्वास
जिससे मेरी रूह होती जाये उनके पास
फिर उन्ही की कृपा से एक दिन ऐसा आयेगा
जब उनकी प्राप्ति से नसीब खिल जाएगा।

अक्सर लंबा लगता है इंतज़ार
पर मिला है कोशिश का मौक़ा इस बार
तो इंतज़ार भी है जैसे इक आशीर्वाद
जिसके मुकम्मल होने पर रूह करेगी इंतज़ार का भी धन्यवाद
और धन्यवाद हर उस प्रभाव को
और हर उस अभाव को
जो बने कारण इस कशिश में
और इस कोशिश में।

इस प्रेरणा के लिए भी शुक्राना गुरुजी महाराज का
शुक्राना बीते कल का और शुक्राना आज का
शुक्राना कि मैं इस ख्वाहिश को कर पा रही हूँ बयाँ
जानती हूँ गुरुजी जानते हैं, वे स्वयं ही तो हैं परमात्मा।

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा

इच्छा थी… (06/25/2026)

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