जून २९, २०२६
ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏
# ३०५३
शांत रहे जो भीतर से
शांत रहे जो भीतर से
वो ना पीड़ित हो इस जहाँ के ज्वर से
वरना इस जहाँ में रहते रहते आजकल स्वाभाविक है अशांति
जो चुरा लेती है तन, मन, और रूह की भी कांति।
गुरुजी ने बख्शा है गुर्बानी का श्रवण और सिमरन
ये वो औषधि है जिससे शांत होता है मन
जिससे होता है भीतर का पवित्रीकरण
और सिमरते सिमरते होता है दुखों का हरण।
बेशक व्याकुल हो मन
और ध्यान ना लग पाये
तो भी भक्त गुरुजी की आज्ञा मान
सिमरन की कोशिश में बैठ जाये
तो भी वह इक कदम है
भीतर की शांति की ओर…
और कोशिश करते करते
जो जुड़ जाये गुरुजी के संग सीधी डोर
तो सिमरन होता जाएगा गहरा
जारी रहेगा गुरुजी का पहरा
मन में उमड़ती लहरें थमने लगेंगी
साँसों पर भी होगा अनुकूल प्रभाव
विचारों की तेज़ हवायें रुकने लगेंगी
मन को महसूस होगा ठहराव।
चल रहा है युग परिवर्तन
ऐसे में शांत रहे मन
ये है बहुत ज़रूरी ख़ुद के वास्ते
अगर तय करने हैं रूहानी रास्ते।
शांत मन से लाभ है रूह को भी और तन को
गुरुजी की कृपा से सम्भालो जीवन को
आज का सिमरन
मिटायेगा कई पुराने गम
कर्मों का बोझ करेगा कम
संवार देगा कई जनम।
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जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा
शांत रहे जो भीतर से (06/29/2026)