जुलाई १, २०२६
ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏
# ३०५५
भवसागर के पार
अक्सर रूहानी ख़ुशबू की बहार
साथ में रूहानी प्यार
मिलता है बेशुमार
जब आते हैं गुरुजी के दरबार।
जन्नत भी इतनी सुंदर ना होगी
जितना सुंदर है गुरुजी का दरबार
सचखंड तो यहीं है
कहे पूरा गुरुपरिवार।
गुरुजी का चाय प्रसाद और लंगर प्रसाद
गुरुजी के सत्संग
गुरबानी का दिव्य रंग
भक्तों के मन में लाता है उमंग।
प्रकृति भी झुक कर करती है सलाम
जब जब लिया जाता है गुरुजी का नाम
गुरुजी का अमृत हरता है रोग को
आशीर्वाद मिलता है भोग को।
शबद की पवित्र आवाज़ जब पहुँचती है भीतर
तो शांति और स्थिरता छूती है मन को
अक्सर गुरुजी का रूहानी स्पर्श
महसूस होता है तन को।
गुरुजी की लीला है ये सब
है ये सब उनकी वडियायी
तभी तो संसार भर में
उनसे इतनी संगत है जुड़ पायी।
वो शांति, वो स्थिरता भीतर समा जाती है
परेशानी के समय में दिलासा दे पाती है
क्यूँकि जब तक हैं तन में प्राण
होते रहेंगे हमारे इम्तहान।
जो आए नन्हे से शिशु बन कर
वे बने गुरुजी महाराज
जिन्होंने कल तक ना जाना था उन्हें
उनमें से कई उन्हें जान चुके हैं आज
कल भी गुरुजी की कृपा से
उनसे जुड़ेंगे और भी जन
गुरुजी की शरण मिलने पर
संवरता है सबका जीवन।
आकाश से भी बड़ा है गुरुजी का आँचल
समस्त संसार रहा है इस आँचल में पल
संगत के अनगिनत कष्ट रहे हैं टल
सैंकड़ों की किस्मत रही है बदल।
ऐसे प्रतापी गुरुजी महाराज को नमन
बशर के रूप में आए स्वयं भगवन्
करने सारी संगत का उद्धार
ले जाने उन्हें भवसागर के पार।
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जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा
भवसागर के पार (07/01/2026)