जुलाई २३, २०२६
ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏
# ३०७७
हर रूह का क़िस्सा
ये दुनिया है सराये
ना अपने रहेंगे, ना रहेंगे पराये
बदलता रहेगा सब
गुरुजी जानें कैसे और कब।
ना घर रहेगा, ना रहेगा पैसा या सोना
मिट्टी से आए सब, मिट्टी में होगा खोना
देह भी बन जाएगी राख की ढेरी
बस, रह जाएगी रूह तेरी और मेरी।
रूह पर भार ना डालें प्रतिकूल करम का
वरना सिलसिला चलता रहेगा जनम मरण का
ओढ़ना होगा कपड़ा शरीर रूपी आवरण का…
इसलिए मिला है जो सहारा गुरुजी के चरण का
तो भीतर को गुरुजी के ख़यालों से आबाद कर
गुज़ारें उनकी शरण में ये सफ़र।
गुरुजी के नाम की चूनर को ओढ़ कर
जैसे जैसे आगे बढ़ेगा ये सफ़र
होता जाएगा ऐसा असर
कि रूह जाएगी निखर।
कहेगा रूह पर चढ़ा नूर
कि गुरुजी की दया नहीं है दूर
हर रूह है उन्ही परमात्मा का हसीन हिस्सा
उन्ही से शुरू उन्ही पर खत्म होता है हर रूह का किस्सा।
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जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा
हर रूह का क़िस्सा (07/23/2026)