अगस्त ४, २०२६
ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏
# ३०८९
असीम महासागर
गुरुजी महाराज हैं असीम महासागर
उनकी लहरें हैं हम सब
वे चाहे जितनी लहरें बना लें
किंतु हम सब मिल कर भी ना बना पायें रब।
नहीं है कोई औक़ात हमारी
गुरुजी महाराज के बिन
हम तो हर बूँद के लिए हैं उनकी मोहताज
और वे रब के रूप में करें हम सब पर राज।
क्यूंकि अनंत लहरों के भी पार
है गुरुजी का विस्तार
और हर लहर को मिले प्यार
गुरुजी से अपरंपार।
लहर में मैल और धूल भी हो
तो भी गुरुजी उसे ले लेते हैं अपने आँचल में
अपने बल से साफ़ कर के लहर को
अपने में ही समा लेते हैं अगले पल में।
युगों युगों से गुरुजी प्यारे
बुलाकर हमें अपने द्वारे
करते हैं हम लहरों के वारे न्यारे
और बने रहते हैं हमारे सहारे।
सिवा अपने मल रूपी कर्मों के भार के
हम लहरें गुरुजी रूपी महासागर को और क्या दे पायें
समर्पण कर अपना अस्तित्व गुरुजी को
क्यों ना उनके सदा हम गुण गायें?
वे महासागर पराक्रमी
हम में हर तरह की कमी
फिर भी मालिक अपनाते हैं
हमें अपना ही हिस्सा बनाते हैं
अपनी रहमतों के रत्नों से
हमारा क़िस्सा सजाते हैं।
ऐसे महासागर को
झुक कर शुक्राना तो कर ही सकती है हर लहर
आख़िरकार, गुरुजी महाराज ही हैं जिनकी कृपा से
हम निर्भय होकर बहती रहती हैं हर पहर।
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जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा