अगस्त १४, २०२६
ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏
# ३०९९
तू फिर से जा जाग
मुसाफिर मतवाले, तू फिर से जा जाग
पचभूतों में छोड़ दे राग
वरना मुसाफ़िर ही रहेगा
क्यूँकि मंज़िल तक नहीं पहुँचेगा।
कभी उत्तर, कभी दक्षिण
कभी पूरब, कभी पश्चिम
दिशा दुविधा में कब खो गया तू
जाग रहा था, फिर क्यों सो गया तू?
शायद खेल है ये समय का
या सामने आ गए कोई पिछले कर्म
गुरुजी से सुर्त को जोड़
नकारात्मकता से मुंह ले मोड़।
गुरुजी महाराज से कर अनुराग
मिटने लगेंगे भीतर के दाग़
हर पाप धुलता जाएगा
रास्ता खुलता जाएगा।
गुरुजी का नाम जपते जपते
कलयुगी अग्नि में तपते तपते
अपने रोम रोम को गुरुजी के दासत्व से युक्त कर ले
अपने भीतर गुरुजी के लिए ऐसा भोला भाव भर ले
कि वे हो जायें तुझ से अति प्रसन्न
देखना, फिर तृप्त होगा तेरा मन
क्यूंकि तूने रिझा लिया होगा जगत के स्वामी को
तूने ख़ुश किया होगा अगम अगोचर अंतर्यामी को
तेरी कोई और चाहत नहीं रहेगी
तेरी हर भावना और कामना गुरुजी की ओर बहेगी
मंज़िल पाकर उनके कमल चरण में
तू समा जाएगा उनकी शरण में।
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जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा
तू फिर से जा जाग (08/14/2026)