अगस्त १५, २०२६
ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏
# ३१००
कभी ना करना अपने से बेगाना
परम पूज्य गुरुजी महाराज,
शुक्राना मुझे वो सोच और कर्म बख्शने के लिए
जिसकी बदौलत आपने मुझे अपने दर पर हाथ जोड़ने दिए
आपने ये मौक़ा जो दिया, मैं तो धन्य हुई
आपकी ममता ने मेरी रूह छुई
मुझे उस अपनेपन का हुआ एहसास
जो है और रहेगा मेरे लिए सबसे अनमोल और ख़ास
क्यूँकि समय की सीमाओं से परे है यह अपनापन
इसलिए ये है अनादि और सनातन।
दुनियावी रिश्ते बदल जाते हैं अक्सर
जैसे बदलता हुआ मौसम
अपनापन का दुनिया में तोल है ऐसे
जैसे वह हो लौकिक धन।
कुछ ऐसी ही है कलयुग की कला
तो किसे कहें बुरा और किसे भला
सूरज भी उदय होकर हर शाम को ढला
और चाँद की भी कम या ज़्यादा होती रहती है कला।
आपके दर पर, आपके चरण में
आती है विश्वास से परिपूर्ण स्थिरता मन में
वह यकीन अटूट
कि बेशक सब जाये छूट
आप ना छोड़ेंगे कभी भी हाथ
आप ना होने देंगे कभी भी अनाथ।
मिला जो आपसे यह कोमल सा अपनापन
तो खुशनसीबी से सजा रहता है मेरा जीवन
आपकी शरण का सहारा मिलता है हर क्षण
जान लिया और मान लिया कि ये है सबसे बहुमूल्य धन।
आपका शुक्रिया करते कभी ना थकूँ
आपके चरणों के तले की धूल भी बन सकूँ
तो ख़ुशी का ना होगा ठिकाना
बस, प्रभु, कभी ना करना अपने से बेगाना।
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जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा
कभी ना करना अपने से बेगाना (08/15/2026)