अगस्त २१, २०२६
ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏
# ३१०६
बख़्शीशें बेअंत…
बख़्शीशें बेअंत
अशीशें अनंत
ना समझना उन्हें केवल इक संत
गुरुजी तो स्वयं हैं भगवंत।
लेकर आए रूप इंसानी
स्वयं सदाशिव के रूप रूहानी
आए संवारने तुम्हारी और मेरी ज़िंदगानी
लिखने हमारे कल्याण की कहानी।
ऐसे सर्वव्यापी सर्वशक्तिमान गुरुवर को प्रणाम
लेते ही जिनका नाम
मन पहुँच जाता है उनके धाम
और उनकी मेहर
सजाती है जीवन का हर पहर
हटाती है भीतर और बाहर का ज़हर
जिससे दूषित रहता है मन और जीवन
ये सब है गुरुजी का ही बड़प्पन।
हमारे जीवन में घोल कर
अपने अनुग्रह की मिठास
गुरुजी महाराज साथ निभाते हैं
रहकर भीतर और आसपास
उनकी मौजूदगी है कण कण में
उनका वास है हर जन में।
जीवन की हर सुबह और शाम के ढलते ढलते
गुरुजी महाराज के आँचल में पलते पलते
उन्हें समर्पित करते हुए हर करम
बीते जो हमारा हर जनम
तो रूहानी ग़रीबी होगी सदा के लिए दूर
पाकर गुरुजी महाराज का सनातन नूर।
🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹
जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा
बख़्शीशें बेअंत… (08/21/2026)