अगस्त २०, २०२६
ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏
# ३१०५
…चाहा मेरा दिल
गुरुजी से मिलने को चाहा मेरा दिल
अकेलापन लग रहा था, चाहे आसपास थी महफ़िल
गुरुजी तो हैं दयावान
वे हैं करुणानिधान
मैंने जब मिलने की की दुआ
तो ऐसा हुआ
कि अन्तस के आँगन में आये वे
चित्त की छाओं पर मीठी धूप बनकर छाये वे
अपनी झाँकी दर्शाई उन्होंने मेरी भावना में
अपनी कोमलता बरसायी उन्होंने मेरी कामना में
भीतर यूँ फैला उनका नूरानी प्रकाश
कि जान गई, वे हैं मेरे बहुत पास
ये सब अंदाज़ थे इतने ख़ास
कि ख़ुशी से मतवाला हुआ यह दास।
मेरे तो रोम रोम में गुरुजी ही गुरुजी समाये इतने प्यार से
मेरा तो समा सुगंधित हुआ उनकी रूहानी ख़ुशबू और दीदार से
और चाहिए भी क्या उसे, जिसे गुरुजी जायें मिल
उसके नसीब की वाटिका का हर फूल जाता है खिल
ये तो गुरुजी की मेहरबानी है, कि उन्होंने स्वीकारा
वे हैं मेरा एकमात्र सहारा
इस दुनिया की मायावी जगमग में
मेरे लिए वे ही सब कुछ हैं इस जग में।
गुरुजी की ही बातें सुनना
गुरुजी की ही बातें करना
लगने लगा है मुझे अच्छा जब से
कुछ और सुनने कहने का जी नहीं करता तब से।
गुरुजी ने मेरा हाथ थामकर
लिया है मुझे संभाल
अपने संग जोड़ कर गुरुजी ने
कर दिया है मुझे निहाल।
🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹
जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा
…चाहा मेरा दिल (08/20/2026)