…बन कर अबोध (08/23/2026)

अगस्त २३, २०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# ३१०८

                                   …बन कर अबोध 

यहाँ आते हैं सब बन कर अबोध
अनिवार्य है करना यहाँ आकर आत्म-बोध
ये जानने और स्वीकारने में ही बीत जाता है जीवन
इसमें सबसे बड़ी बाधा अक्सर बनता है अपना ही मन
इसलिए कल्याण के लिए ज़रूरी है आध्यात्मिक जागरण
जिसके लिए करते रहना होगा गुरु गोविन्द का मनन।

करनी होगी बुद्धि की दिशा आत्मा की ओर
करनी होगी मन की दिशा परमात्मा की ओर
मन को एकाग्र करना ही है एकमात्र उपाय
जिसमें गुरुजी का नाम और मंत्र है सदा सहाय
गुरुजी स्वयं रूप हैं भगवान का
और मन में दीप जलाकर उनके नाम का
जागरूक के साथ साथ होना होगा सजग
वरना यह मोह माया और यह जग
और यहाँ के आकर्षण
बनेंगे ऐसे विकर्षण
कि स्थिर ना हो पायेगा मन
और बिन असल चीज़ पाये गुज़र जाएगा जीवन।

प्राप्त और पर्याप्त के बीच का ही तो है ये सफ़र
उसकी होगी फ़तह जिसका मन होगा शांत और स्थिर
जिसका मन गुरुजी की याद की ओर मुड़ा रहेगा
जिसका मन गुरुजी के वचन रूपी चरण से जुड़ा रहेगा
जिसका होगा गुरुजी को आत्मा-समर्पण
गुरुजी का सानिध्य सदा पायेगा वह जन
बेशक जिस भी युग के जैसे भी हालात से घिरे होंगे धरती गगन
वह जन सफल होगा रहकर गुरुजी की लगन में मगन।

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा

…बन कर अबोध (08/23/2026)

Leave a comment