अगस्त २४, २०२६
ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏
# ३१०९
बंदगी का ये सुंदर बंधन
गुरुजी महाराज, सदाशिव के रूप
गुरुजी महाराज की लीला अनूप
गुरुजी की कृपा से ही छाओं और धूप
सभी के भीतर बसे उनका स्वरूप
फिर क्यों भूल जाते हैं अक्सर सब
कि भीतर हमारे बसते हैं वे रब
ढूँढते रहते हैं बाहर उन्हें ज़्यादातर
और माथा टेकते हैं दर दर पर।
गुरुजी महाराज में देवी देवता सब हैं
गुरुजी महाराज स्वयं रब हैं
उनकी लीला है इंसानी सोच और तर्क-वितर्क के पार
संकट मोचन हैं वे, संभालते हैं सारा संसार
आज तक उनका आदि और अंत कोई ना जान पाया
हर ब्रह्मांड गुरुजी महाराज में है समाया।
वे त्यागी, रसिक बैरागी हैं स्वयं
किंतु अपने भक्तों को भोग के रास्ते से ले जाते हैं
जैसे जिसके कर्म और जैसा जिसका कल्याण
वैसे वैसे वे गुरुजी की कृपा से मोक्ष पाते हैं।
अनासक्ति का पाठ भी गुरुजी पढ़ाते हैं
बंदा बनना भी सिखाते हैं
रूहानी उन्नति का रास्ता दिखाते हैं
गुरुजी पुरुषार्थ पूरा कराते हैं।
गुरुजी से जुड़ाव
गुरुजी से लगाव
और भक्त जो उनमें खोता है
ये भी उनकी कृपा से ही होता है
इसलिए ये स्वयं में है संकेत ख़ुशक़िस्मती का
ये ख़ुद में है लक्षण भविष्य में सद्गति का।
गुरुजी के मनन और स्तवन में गुज़र जाये जिसका जीवन
बहुत खुशनसीब होता है वह जन
तर जाती है उसकी आत्मा और उसका तन मन
पूर्ण रूप से कल्याणकारी है बंदगी का ये सुंदर बंधन।
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जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा
बंदगी का ये सुंदर बंधन (08/24/2026)