सितंबर ३, २०२६
ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏
# ३११९
कृपासिंधु
कृपासिंधु हैं सतगुरु सुंदर
बसे हुए तुम्हारे भीतर
सो कर मिलन के लम्हे व्यर्थ ना गँवाओ
गुरुजी के संग वक़्त बिताओ
अब तो जाओ जाग
निद्रा को दो त्याग
तुम्हारा शरीर जड़ है पर आत्मा है चेतन
क्यों भूल जाता है ये तुम्हारा मन?
गुरुजी के नाम में है कृपा प्रसाद
इसके समक्ष फीका है हर संसारी स्वाद
सेवा, सिमरन, सत्संग से मिलती है शक्ति
निखरती जाती है भक्ति
बढ़ने लगता है समर्पण का भी भाव
और गुरूजी की याद में रहने का चाव
इसी में है सुख और संतोष असल
इसलिए कर लो जीवन सफल।
करते रहो हर फ़र्ज़ अदा
पर गुरुजी से तार जुड़ी रहे सदा
ये है बहुत ज़रूरी
ताकि बढ़ ना जाए उनसे दूरी।
कृपा सिंधु के आँचल में समा जाना
वही तो है रूह का अंतिम आशियाना
बाक़ी हर दर, हर घर में तुम हो मेहमान
इस सत्य से ना बनो अनजान।
तुमने गुरुजी की छवि मन में है बसायी
ये भी है स्वयं गुरुजी की ही वड्डीयाई
असीम है उन कृपासिंधु की गहराई
जिनमें कृपा की अनगिनत बूँदें हैं समायी।
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जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा
कृपासिंधु (09/03/2026)