ितंबर २९, २०२६
ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏
# ३१४५
ना ये बुद्धि है मेरी…
ना ये बुद्धि है मेरी
ना ही मेरा है ये मन
ना ये इंद्रियाँ या तन
गुरुजी, आई मैं आपकी शरण।
फिर क्यों मुझे ये लागें मेरे
माया के चक्कर मुझे हैं घेरे
सिखा दीजिये मुझे समर्पण करना
फिर मुझे कभी ना पड़ेगा डरना।
ना करूँ आपके हुक्म की अवहेलना
बेशक मुझे दुख पड़े झेलना
क्यूँकि आपका हुक्म मानकर पहुँचूँगी उस सनातन सुख तक
जिसे हर कोई ढूँढता है अथक।
सब कुछ सौंप दूँ आपको
हर सुख दुख, हर संताप को
अपने हर श्वास को
अपने विश्वास को
अपने प्रयास को
अपनी हर आस को
अपने अस्तित्व, अपने हर करम को
अपने जनम और मरण को।
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जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा
ना ये बुद्धि है मेरी… (09/29/2026)