थक थक कर… (10/01/2026)

अक्तूबर १, २०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# ३१४७

                        थक थक कर…

थक थक कर
भटक भटक कर
आया भक्त गुरुजी के दर
पाने परवरदिगार को।

लेकर गुरुजी के लिए मन में प्यार
करने लगा अपने प्यार का इज़हार
आँखों में आँसू आए बार बार
मुस्कुराहटें भी आयीं दो चार।

था भावनाओं का अजब सा मिश्रण
बीत गए इसी में कई क्षण
छुए उसने जो गुरुजी के कमल चरण
तो गुरुजी में यूँ विलीन हुआ उसका मन
कि सुध बुध ना रही कोई और
और गुरु कृपा से शुरू हुआ उसके जीवन में इक ऐसा दौर
कि होने लगा गुरुजी में ही मगन
लग गई गुरुजी से उसकी लगन।

सुबह शाम बस गुरुजी का ध्यान
सदा मन में गुरुजी का नाम
बढ़ता गया उसका गुरुजी के प्रति प्यार
संसार में रहते हुए छूटने लगा संसार।

गुरुजी की रहमत ने उसे यूँ छुआ
कि वह भक्त जीवनमुक्त हुआ
जीते जी मिला ऐसा आशीर्वाद
जो मिलता है ना जाने कितने जन्मों के बाद।

भक्त करता रहा गुरुजी से प्यार
गुरुजी की दया से हुआ उसका उद्धार
गुरुजी ले चलें सबको भवसागर के पार
गुरुजी से विनती है ये बारम्बार।

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा

थक थक कर… (10/01/2026)

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